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खतरे में धारी देवी मंदिर! परिसर तक पहुंची अलकनंदा नदी, अलर्ट पर प्रशासन, धारी देवी मंदिर को कराया बंद

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श्रीनगर गढ़वाल/देवप्रयाग, 29 अगस्त। उत्तराखंड में कल सुबह से ही आसमान से आफत बरस रही है. रुद्रप्रयाग, चमोली और टिहरी गढ़वाल जिलों में अतिवृष्टि से हालात खराब हैं. रुद्रप्रयाग के बसुकेदार में बादल फटने से भारी तबाही हुई है. इसके साथ ही अलकनंदा नदी भी उफान पर है. इस बीच धारी देवी मंदिर का वीडियो डरा रहा है. यहां अलकनंदा नदी का पानी मंदिर तक पहुंच गया है. धारी देवी के पास लगने वाली दुकानें भी बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं. धारी देवी मंदिर से सामने आया वीडियो 2023 की केदारनाथ आपदा की याद दिला रहा है.

साल 2013 में भी अलकनंदा नदी ने जमकर कहर बरपाया था. इस दौरान इस क्षेत्र में काफी नुकसान हुआ था. तब रुद्रप्रयाग, श्रीनगर, देवप्रयाग, ऋषिकेश तक इसका असर देखने को मिला था. आज सुबह से ही एक बार फिर अलकनंदा उफान पर है. जिसके कारण इसके किनारे के घाट पूरी तरह से डूब चुके हैं.

सिरोबगड़ से लगभग 800 मीटर आगे श्रीनगर की तरफ (गोवा ब्रिज नामक स्थान) पर अलकनंदा नदी का जलस्तर बढने से पानी हाईवे तक पहुंच गया. जिसके कारण आवाजाही पूरी तरह से बाधित हो गई थी. वहीं, इसी के पास धारी देवी मंदिर भी अलकनंदा नदी के उफान पर आने के कारण डूबा सा नजर आया. धारी देवी मंदिर के पास भी अलकनंदा विकराल रूप में बह रही है. अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण धारी देवी मंदिर के पिलर पूरी तरह से डूब चुके हैं. धारी देवी मंदिर के आस पास के इलाके भी पूरी तरह से जलमग्न हो गये हैं. नदी इससे पहले साल 2013 में आई आपदा के दौरान ऐसे हालात बने थे. उफान पर अलकनंदा और धारी देवी मंदिर से जुड़ी खबरें सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है. हर कोई धारी देवी मंदिर के लगभग पानी में डूबे वीडियोज से चिंतित हैं.

चेतावनी रेखा से ऊपर पहुंचा जलस्तर


इधर, कलियासौड़ से लगभग एक किलोमीटर आगे मिनी गोवा बीच पर अलकनंदा का पानी राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंच गया जिससे सड़क जलमग्न हो गई और वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। बाद में पानी कम होने पर यातायात बहाल किया गया। श्रीनगर में अलकनंदा नदी का जलस्तर सुबह 534.80 मीटर दर्ज किया गया जो दोपहर तक बढ़कर 535.80 मीटर तक पहुंच गया। यह चेतावनी स्तर (535 मीटर) से ऊपर है हालांकि नदी अभी खतरे के निशान (536 मीटर) से नीचे है। तेज बहाव के कारण अलकेश्वर घाट पूरी तरह से डूब गया जिससे नदी किनारे रहने वाले और दुकानदार दहशत में आ गए। प्रशासन ने लोगों को नदी से दूर रहने की चेतावनी दी है और पुलिस और नगर निगम की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।

बता दें धारी देवी के चारधाम की रक्षक देवी के रूप में पूजा जाता है. माना जाता है कि धारी देवी में मूर्ति दिन में तीन बार स्वरूप बदलती है. 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद से धारी देवी की मान्यता देश विदेशों में बढ़ी है. कहा जाता है कि 2013 में धारी देवी को अपलिफ्ट करने के बाद ही केदारनाथ आपदा आई थी. साल 2013 की आपदा के बाद से धारी देवी में हर साल चारधाम यात्रा के समय भक्तों का तांता लगा रहता है.

प्रशासन की टीम रखे है नजर
जिलाधिकारी ने धारी देवी क्षेत्र की दुकानों और श्रीनगर में नदी किनारे स्थित स्कूलों को सुरक्षा की दृष्टि से बंद करा दिया है और यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन और पुलिस की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रही हैं। यह स्थिति 2013 की आपदा की याद दिला रही है और स्थानीय लोग चिंतित हैं कि कहीं हालात और न बिगड़ें।

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