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बिथ्याणी डिग्री कालेज में सूचना के अधिकार की पृष्ठभूमि पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

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यमकेश्वर, 15 अक्टूबर। भारतीय लोकतंत्र को मज़बूत करने और शासन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से 13 अक्टूबर को महायोगी गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय bithyani यमकेश्वर पौड़ी गढ़वाल में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ आयोजक प्रभारी प्राचार्य डॉ गिरिराज सिंह द्वारा किया किया गया। कार्यशाला में मुख्य वक्ता डॉ अमित कुमार जयसवाल प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष शिक्षाशास्त्र श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर गोपेश्वर चमोली रहे। प्रोफेसर अमित ने सूचना के अधिकार को निम्न प्रकार बताते हुए छात्र/छात्राओं का मार्गदर्शन किया।

सूचना के अधिकार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वैश्विक स्तर सूचना के अधिकार को एक नई पहचान तब मिली जब वर्ष 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स को अपनाया गया। इसके माध्यम से सभी को मीडिया या किसी अन्य माध्यम से सूचना मांगने एवं प्राप्त करने का अधिकार दिया गया। अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति थॉमस जैफरसन के अनुसार, “सूचना लोकतंत्र की मुद्रा होती है एवं किसी भी जीवंत सभ्य समाज के उद्भव और विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।” भारतीय लोकतंत्र को मज़बूत करने और शासन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से भारतीय संसद ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 लागू किया गया।

RTI की कुछ प्रसिद्ध उपलब्धियां
2G घोटाला यह घोटाला उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग का सबसे प्रमुख उदाहरण है। इस घोटाले के कारण भारत सरकार को 1,76,645 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। उल्लेखनीय है कि यह बड़ा घोटाला तब सामने आया जब एक RTI कार्यकर्त्ता ने अधिनियम का उपयोग कर इसके खिलाफ एक RTI दायर की।

2010 कॉमनवेल्थ गेम घोटाला
एक गैर-लाभकारी संगठन द्वारा दायर एक RTI से पता चला था कि दिल्ली सरकार ने राष्ट्रमंडल खेलों के लिये दलित समुदाय के कल्याण हेतु रखे गए फंड से 744 करोड़ रुपए निकाले थे। साथ ही RTI से यह भी सामने आया कि निकाले गए पैसों का प्रयोग जिन सुविधाओं पर किया गया वे सभी मात्र कागज़ों तक ही सीमित थीं।

प्रोफेसर अमित ने उपर्युक्त सूचना के अधिकार से संबंधित जानकारी प्रदान करते हुए अपने व्याख्यान को समाप्त किया कार्यशाला का संचालन डॉ नीरज नॉटियाल ने किया किया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार की उपस्थिति सराहनीय थी । कार्यशाला का समापन आभासी माध्यम से प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ) योगेश कुमार शर्मा द्वारा प्रोफेसर अमित को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए किया।

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