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राजकीय मेडिकल कालेज श्रीनगर में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए पीजी पाठ्यक्रमों की सीटें बढ़ी

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श्रीनगर गढ़वाल, 17 दिसम्बर। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए विभिन्न स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएट) पाठ्यक्रमों में सीटों की स्वीकृति प्रदान की गई है. यह स्वीकृति राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड द्वारा प्रदान की गई है. दस सीटों की और स्वीकृति से मेडिकल कॉलेज में पीजी की 62 सीटें हो गयी है.

चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड ने विशेषज्ञों के समूह एवं समीक्षा समिति के साथ मिलकर संस्थान का भौतिक निरीक्षण व मानक मूल्यांकन प्रपत्र के माध्यम से आकलन किया. इसके अंतर्गत मूल्यांकनों की रिपोर्ट एवं संस्थान द्वारा प्रस्तुत स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट की विस्तृत समीक्षा की गई. यह प्रक्रिया चिकित्सा संस्थानों की स्थापना, मूल्यांकन एवं रेटिंग विनियम और स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा नियमावली के प्रावधानों के अनुसार संपन्न हुई.

समीक्षा के उपरांत राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए संस्थान को डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (एमडी) बाल रोग में चार सीटें, एमडी एनेस्थीसियोलॉजी में चार सीटें और मास्टर ऑफ सर्जरी (एमएस) प्रसूति एवं स्त्री रोग में दो सीटें प्रदान की गई हैं.

इन सभी पाठ्यक्रमों के संचालन हेतु अनुमति पत्र जारी करने का निर्णय लिया गया है. इसके साथ ही आयोग द्वारा यह भी निर्देश दिए गए हैं कि एमडी जनरल मेडिसिन, त्वचा, यौन रोग, जैव रसायन विज्ञान व एमएस जनरल सर्जरी एवं अस्थि रोग विभागों में आवश्यक मानकों की पूर्ति करते हुए संस्थान 15 दिनों के भीतर पुनः अपील प्रस्तुत कर सकता है.

बता दें प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत के प्रयासों से लगातार मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी से लेकर तमाम सुविधाएं देने का सतत प्रयास जारी हैं, जिससे पीजी कोर्स की लगातार सीटें मिल रही है.

संस्थान के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने इसे संस्थान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह स्वीकृति क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा को सशक्त बनाएगी. उन्होंने कहा कि पीजी सीटों के मिलने से न केवल संस्थान की शैक्षणिक क्षमता बढ़ेगी, बल्कि राज्य को अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक भी मिल सकेंगे. शेष विभागों में निर्धारित आवश्यकताओं को शीघ्र पूरा कर पुनः आवेदन किया जाएगा.

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