उत्तराखंडक्राइमयूथ कार्नरशिक्षा

CUET के विरोध में सोमवार से गढ़वाल विवि की छत पर डटे हैं छात्र, कुलपति का पुतला फूंका

Listen to this article

श्रीनगर, 23 दिसम्बर। सोमवार को छात्रसंघ अध्यक्ष महिपाल बिष्ट, महासचिव अनुरोध पुरोहित और छात्र नेता देवांश नौटियाल स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए CEUT की अनिवार्यता के खिलाफ भवन की छत पर चढ़े थे। मंगलवार को छात्रसंघ के अन्य पदाधिकारी और छात्र नेता भी समर्थन में वहां पहुंच गए। इसी दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्रों ने डीएसडब्ल्यू भवन के मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला जड़ दिया, जिससे दिनभर अधिकारी, कर्मचारी और छात्र भवन में प्रवेश नहीं कर सके।

छात्रों ने छत पर ही कुलपति का पुतला जलाया
गढ़वाल विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीयूईटी CEUT को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ छात्रों का आंदोलन मंगलवार को भी थमता नजर नहीं आया। विश्वविद्यालय स्तर पर प्रवेश परीक्षा बहाल करने की मांग को लेकर छात्र पिछले 36 घंटे से डीएसडब्ल्यू कार्यालय भवन (सीनेट हॉल की ऊपरी मंजिल) की छत पर डटे हुए हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद छात्र सोमवार की रात छत पर ही रहे। मंगलवार को भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस फैसला न आने पर छात्रों ने दोपहर के समय भवन की छत पर ही कुलपति का पुतला दहन किया। छात्रसंघ अध्यक्ष महिपाल बिष्ट ने स्पष्ट कहा कि जब तक कुलपति स्वयं मौके पर आकर पीजी में सीयूईटी व्यवस्था समाप्त करने का लिखित आश्वासन नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

छात्र नेताओं ने बताया कि पूर्व में विश्वविद्यालय स्तर पर प्रवेश परीक्षा के माध्यम से पीजी में दाखिले होते थे, लेकिन कुलसचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार 2026-27 शैक्षणिक सत्र से सीयूईटी को अनिवार्य कर दिया गया है। महासचिव अनुरोध पुरोहित और उपाध्यक्ष शिवांक नौटियाल ने कहा कि पर्वतीय राज्य में एनटीए द्वारा पर्याप्त परीक्षा केंद्र न होने से छात्रों को देहरादून, हल्द्वानी और उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में परीक्षा देने जाना पड़ता है, जिससे आर्थिक और मानसिक परेशानी बढ़ती है। कोषाध्यक्ष आयुष वेदवाल और विवि प्रतिनिधि अनमोल जयाड़ा ने कहा कि स्नातक स्तर पर भी सीयूईटी लागू होने से पहाड़ के कई छात्र आर्थिक तंगी के कारण उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालय को पीजी और यूजी दोनों स्तरों पर अपनी प्रवेश परीक्षा प्रणाली लागू करनी चाहिए।

विवि के छात्रों को 30 प्रतिशत सीटों का प्रस्ताव ठुकराया
मंगलवार को प्रशासनिक भवन में अधिकारियों और शिक्षकों की बैठक हुई। इसके बाद देर शाम कुलसचिव प्रो. आरके ड्योढी के नेतृत्व में अधिकारियों ने छात्रों से वार्ता की। कुलसचिव ने बताया कि कुलपति ने संकाय सदस्यों से विचार-विमर्श कर पीजी पाठ्यक्रमों में विश्वविद्यालय के छात्रों को 30 प्रतिशत सीटों पर आरक्षण देने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि छात्रों ने इस प्रस्ताव को नकारते हुए कहा कि उनकी मूल मांग सीयूईटी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करना है। देर रात तक आंदोलन जारी रहा। इस दौरान दर्जनभर छात्र डीएसडब्ल्यू भवन के भूतल पर और आधा दर्जन से अधिक छात्र भवन की छत पर डटे रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button