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देहरादून से पांवटा साहिब सिर्फ 35 मिनट में, फोरलेन से उत्तराखंड-हिमाचल के बीच संपर्क आसान

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देहरादून, 16 जनवरी। पांवटा साहिब-देहरादून कॉरिडोर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग साबित हुआ है। देहरादून एवं पांवटा साहिब-बल्लूपुर कॉरिडोर से जुड़े पर्यटन एवं औद्योगिक क्षेत्रों में प्रतिदिन भारी यातायात दबाव के चलते अत्यधिक यात्रा समय, ईंधन की खपत और यातायात अव्यवस्था की स्थिति बनी रहती थी। इस फोरलेन मार्ग से अब सफर आसान हो गया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना अधिकारी सौरभ सिंह के मुताबिक, बढ़ते यातायात दबाव, सीमित सड़क चौड़ाई, रिबन डेवलपमेंट तथा तीव्र शहरी विस्तार के कारण यह मार्ग लंबे समय से जाम एवं सड़क सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से जूझ रहा था। इन्हीं को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा पांवटा साहिब-बल्लूपुर के बीच 44.800 किलोमीटर लंबे खंड को फोरलेन किया जा रहा है। यह मार्ग दैनिक यात्रियों, औद्योगिक एवं वाणिज्यिक यातायात के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है तथा चारधाम यात्रा के प्रथम धाम, यमुनोत्री तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करता है।
सौरभ सिंह ने बताया कि मौजूदा पांवटा साहिब-बल्लूपुर सड़क की कुल लंबाई लगभग 52 किलोमीटर है। प्रस्तावित चार-लेन परियोजना के अंतर्गत लगभग 25 किलोमीटर ग्रीनफील्ड हाईवे विकसित किया गया है, जो पांवटा साहिब, हरबर्टपुर, सहसपुर, सेलाकुई और सुद्धोवाला जैसे भीड़भाड़ वाले कस्बों को बायपास करता है। इस ग्रीनफील्ड बायपास से मार्ग की लंबाई में सात किलोमीटर की कमी आई है।
परियोजना की लागत 1,646.21 करोड़ रुपये
इस परियोजना को हाइब्रिड एन्यूटी मोड (हैम) के अंतर्गत दो पैकेजों में पूरा किया जा रहा है। पहला पैकेज पांवटा साहिब से मेदनीपुर है, जो 18.700 किमी लंबा है और इसकी लागत 553.21 करोड़ है। इसके अंतर्गत 1,175 मीटर लंबा चार-लेन यमुना नदी पुल निर्मित किया गया है। दूसरा पैकेज मेदनीपुर से बल्लूपुर-देहरादून है, जो 26.100 किमी लंबा है। इस पैकेज की लागत 1,093 करोड़ रुपये है। इसमें कई अंडरपास, सर्विस रोड तथा शहरी बायपास शामिल हैं। परियोजना से कुल 25 गांव प्रभावित हैं, जिनमें 21 गांव उत्तराखंड के और चार गांव हिमाचल प्रदेश में शामिल हैं।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से एकीकरण
परियोजना निदेशक सौरभ सिंह ने बताया कि यातायात जाम की समस्या के निराकरण के लिए एनएचएआई द्वारा इस कॉरिडोर के उच्चीकरण के साथ-साथ एक ग्रीनफ़ील्ड हाईवे का भी विकास किया जा रहा है, जो दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का विस्तार होगा। इस एकीकरण से देहरादून शहर में प्रवेश करने वाले थ्रू-ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा, जिससे शहर को यातायात जाम से बड़ी राहत मिलेगी।

इस पूरे मार्ग पर हाईटेक कैमरे भी लग गए हैं और भविष्य के हिसाब से मार्ग और पुल तैयार किया गया है. देहरादून-हिमाचल को जोड़ने के लिए एक पुल यमुना नदी पर भी बनाया गया है, जिसकी लागत लगभग 162 करोड़ रुपए है. फिलहाल जल्द ही ये मार्ग आम जनता और सेलाकुई जैसे औद्योगिक क्षेत्र के लिए खुल जाएगा.
सुमित, एनएचएआई इंजीनियर

औद्योगिक क्षेत्र पांवटा साहिब को मिलेगा सीधा फायदा
पांवटा साहिब, हिमाचल प्रदेश का एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है. यहां दवा, सीमेंट, पैकेजिंग और अन्य उद्योग बड़ी संख्या में मौजूद हैं. देहरादून और पांवटा साहिब के बीच बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से औद्योगिक परिवहन को बड़ा फायदा होगा. कच्चा माल और तैयार माल की आवाजाही तेज होने से लागत कम होगी और समय की बचत भी होगी. इसका असर देहरादून के व्यापारियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर भी साफ दिखाई देगा.

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