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DGCA का इंडिगो पर ठोका 22 करोड़ का जुर्माना, वाइस प्रेसिडेंट को हटाने के निर्देश

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नई दिल्ली, 17 जनवरी। इंडिगो फ्लाइट संकट मामले पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए की जांच रिपोर्ट सामने आ गई है. रिपोर्ट में इंडिगो एयरलाइंस की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है. डीजीसीए ने इंडिगो पर कुल 22 करोड़ 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. इसके अलावा एयरलाइन को डीजीसीए के पक्ष में 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी भी जमा करनी होगी, ताकि निर्देशों का पालन और लंबे समय के लिए सिस्टम में सुधार सुनिश्चित किया जा सके.

डीजीसीए के आदेश के मुताबिक, 50 करोड़ रुपये की इस बैंक गारंटी के तहत एक सुधार ढांचा बनाया गया है, जिसे इंडिगो सिस्टमिक रिफॉर्म एश्योरेंस स्कीम (ISRAS) नाम दिया गया है. इसका मकसद भविष्य में ऐसी अव्यवस्थाओं को रोकना है. इसके साथ ही इंडिगो पर छह अलग-अलग प्रावधानों के उल्लंघन को लेकर एकमुश्त आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है. हर उल्लंघन पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. इस तरह कुल एकमुश्त जुर्माना 1 करोड़ 80 लाख रुपये बैठता है.

वाइस प्रेसिडेंट को हटाने के निर्देश
डीजीसीए ने इंडिगो के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की है. एयरलाइन के सीईओ को उड़ान संचालन और संकट प्रबंधन में समग्र निगरानी की कमी को लेकर चेतावनी दी गई है. अकाउंटेबल मैनेजर यानी सीओओ को विंटर शेड्यूल 2025 और संशोधित उड़ान ड्यूटी समय सीमा नियमों के असर का सही आकलन न करने पर चेतावनी जारी की गई है. वहीं सीनियर वाइस प्रेसिडेंट को ऑपरेशनल जिम्मेदारियों से हटाने और भविष्य में किसी भी जवाबदेह पद पर नियुक्त न करने के निर्देश दिए गए हैं.

डीजीसीए की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उड़ानों में भारी देरी और रद्द होने की मुख्य वजह जरूरत से ज्यादा ऑपरेशन को ऑप्टिमाइज करना, नियामकीय तैयारियों की कमी और सिस्टम सॉफ्टवेयर से जुड़ी खामियां रहीं. इसके अलावा इंडिगो के प्रबंधन ढांचे और ऑपरेशनल कंट्रोल में भी गंभीर कमियां पाई गईं.

क्यों पैदा हुआ था संकट?
रिपोर्ट में कहा गया है कि एयरलाइन प्रबंधन समय रहते योजना की खामियों को पहचानने में नाकाम रहा. पर्याप्त ऑपरेशनल बफर नहीं रखा गया और संशोधित उड़ान ड्यूटी नियमों को ठीक से लागू नहीं किया गया. इसका नतीजा यह हुआ कि बड़ी संख्या में उड़ानें लेट हुईं और रद्द करनी पड़ीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.

जांच में यह भी सामने आया कि इंडिगो का पूरा फोकस क्रू, विमान और नेटवर्क संसाधनों के अधिकतम इस्तेमाल पर था. इससे रोस्टर बफर काफी कम हो गया. क्रू रोस्टर इस तरह बनाए गए कि ड्यूटी समय को अधिकतम खींचा जा सके. इसके लिए डेड हेडिंग, टेल स्वैप, लंबी ड्यूटी और बहुत कम रिकवरी समय पर भरोसा किया गया. इस रणनीति से रोस्टर की मजबूती कमजोर हुई और संचालन की क्षमता पर असर पड़ा. डीजीसीए की जांच में दीर्घकालिक सुधारों पर भी जोर दिया गया है, ताकि भविष्य में ऐसे हालात दोबारा न बनें और यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो.

आंतरिक जांच भी कर रहा DGCA
इस पूरे मामले में नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने इंडिगो में मची अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया था. डीजीसीए की ओर से लगाया गया कुल जुर्माना 22.20 करोड़ रुपये है. वहीं इंडिगो के शीर्ष अधिकारियों पर फिलहाल चेतावनी और सावधानी बरतने जैसी कार्रवाई की गई है.

डीजीसीए ने यह भी कहा है कि अपने स्तर पर भी सुधार के लिए एक आंतरिक जांच की जा रही है, ताकि डीजीसीए के भीतर सिस्टम से जुड़ी कमियों को पहचाना जा सके और उन्हें दुरुस्त किया जा सके.

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