CBSE के 12वीं तक के हर स्कूल में 500 स्टूडेंट्स पर एक काउंसलर अनिवार्य होगा

नई दिल्ली, 21 जनवरी। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने अपने सभी स्कूलों में काउंसलिंग और वेलनेस टीचर के साथ-साथ करियर काउंसलर रखना जरूरी कर दिया है। हर 500 स्टूडेंट्स पर एक काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य होगी। इसे लेकर सीबीएसई बोर्ड ने अपने एफिलिएशन बायलॉज 2018 में संशोधन कर दिया है। ये खबर न सिर्फ स्कूल और स्टूडेंट्स, बल्कि पैरंट्स के लिए भी जरूरी है। ताकि आप जान पाएं कि आपका बच्चा जिस स्कूल में पढ़ता है, वहां इन नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
स्टूडेंट-टीचर रेशियो 1:500, दो भूमिकाएं होंगी
सीबीएसई के अनुसार, हर 500 स्टूडेंट्स पर एक काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य होगी। यानी काउंसलर-स्टूडेंट अनुपात 1:500 रखा जाएगा। स्कूलों में काउंसलिंग और वेलनेस टीचर, जो कि सोशियो-इमोशनल काउंसलर हो और करियर काउंसलर की नियुक्ति अब सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों में अनिवार्य होगी। यह संशोधन सीबीएसई एफिलिएशन कमिटी की सिफारिशों और गवर्निंग बॉडी की मंजूरी के बाद अधिसूचित किया गया है। नए संशोधन के तहत अब हर सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी सीबीएसई स्कूल को दो अलग-अलग भूमिकाओं के लिए नियुक्ति करनी होगी-
पहली भूमिका- काउंसलिंग और वेलनेस टीचर (सोशियो-इमोशनल काउंसलर)
दूसरी भूमिका- करियर काउंसलर।
सीबीएसई काउंसलिंग और वेलनेस टीचर कौन होगा?
इस पोस्ट के लिए साइकलॉजी (क्लिनिकल/ काउंसलिंग/ एप्लाइड/ एजुकेशनल) में ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन किया होना या मानसिक स्वास्थ्य/ काउंसलिंग में सोशल वर्क की डिग्री या किसी भी सब्जेक्ट में यूजी/पीजी डिग्री + डिप्लोमा इन स्कूल जरूरी है। इन्हें सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा , मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान, अभिभावक-शिक्षक संवेदनशीलता और प्राइवेसी जैसे क्षेत्रों का ज्ञान होना चाहिए।
सीबीएसई करियर काउंसलर कौन होगा?
इसके लिए ह्यूमैनिटीज, साइंस, सोशल साइंस, मैनेजमेंट, एजुकेशन या टेक्नोलॉजी में बैचलर्स/ मास्टर्स डिग्री जरूरी होगी। उन्हें करियर असेसमेंट, हायर एजुकेशन (भारत और वैश्विक स्तर) की जानकारी, रिसर्च स्किल्स और स्टूडेंट्स-पैरंट्स को करियर गाइडेंस देने में सक्षम होना होगा।
दोनों ही पदों पर नियुक्त व्यक्तियों को कम से कम 50 घंटे के कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम (CBPs) भी पूरे करने होंगे। सीबीएसई ने यह भी साफ किया है कि जहां करियर काउंसलर नहीं है, वहां स्कूल अस्थायी रूप से किसी प्रशिक्षित शिक्षक को नॉमिनेट कर सकता है, लेकिन उसे दो एकेडेमिक सेशन के भीतर तय योग्यता पूरी करनी होंगी।
अब तक क्या होता था?
अब तक हर सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूल में एक ही व्यक्ति काउंसलिंग और वेलनेस टीचर के रूप में नियुक्त किया जाता था। यह पोस्ट परमानेंट होती थी, लेकिन अलग से करियर काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य नहीं थी। योग्यता के तौर पर साइकोलॉजी, चाइल्ड डेवलपमेंट या करियर गाइडेंस और काउंसलिंग में यूजी/पीजी या डिप्लोमा मान्य था। जिन स्कूलों में क्लास 9 से 12 तक स्टूडेंट्स की संख्या 300 से कम थी, वहां पार्ट-टाइम काउंसलर रखने की अनुमति थी। काउंसलर-स्टूडेंट अनुपात और भूमिकाओं का साफ-साफ विभाजन पहले तय नहीं था।



