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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में हरिद्वार के पूर्व मेयर पति ने कराया मुंडन, यूपी सरकार को घेरा

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हरिद्वार, 21 जनवरी। प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान किए जाने से रोके जाने और उनके शिष्यों के साथ की गई कथित अभद्रता का देशभर में विरोध जारी है. ब्राह्मण समाज के लोगों ने हरिद्वार के चंद्राचार्य चौक पर प्रयागराज प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया. इस दौरान पूर्व मेयर अनीता शर्मा के पति अशोक शर्मा ने अपना मुंडन कराकर विरोध दर्ज करवाया. उनके साथ रणवीर शर्मा और मुकेश शर्मा ने भी अपना मुंडन कराकर प्रयागराज प्रशासन से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पास जाकर माफी मांगने की मांग की. प्रदर्शन को ब्राह्मण समाज के साथ कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी समर्थन दिया.

कांग्रेस नेता अशोक शर्मा ने कहा प्रयागराज में जिस तरह का व्यवहार, भाजपा सरकार के राज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ किया जा रहा है, वह निंदनीय है. उन्होंने आरोप लगाया कि वहां ब्राह्मणों की शिखा पड़कर उनसे अभद्रता और मारपीट की गई. भाजपा की सरकार में यह साफ दर्शाता है कि किस तरह से भाजपा सरकार मे ब्राह्मणों का शोषण हो रहा है. इतना ही नहीं प्रशासन अभी भी हठधर्मिता पर उतरा हुआ है, ना तो अब तक कोई शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से माफी मांगने पहुंचा है ना ही किसी को उनके अन्न जल त्यागने की चिंता है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन में अपने बालों का मुंडन करने वाले रणवीर शर्मा ने बताया कि जिस तरह की फोटो वीडियो प्रयागराज में देखने को मिली है, वो हृदय विदारक है. भाजपा सरकार के राज में ब्राह्मणों के साथ ऐसा व्यवहार होगा, इसकी कल्पना भी नहीं की थी. प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों और वेदपाठी ब्राह्मणों के साथ ऐसा बर्ताव देखकर मन व्यथित है. इसलिए उन्होंने अपना मुंडन कराकर विरोध दर्ज करवाया है.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में हरकी पैड़ी पर धरना
शंकराचार्य को शंकराचार्य, प्रशासन तय नहीं कर सकता है. यह पद साधु संतों की ओर से चुना जाता है, जो कि सरकार का विषय नहीं है. प्रयागराज में जिस तरह से कृत्य यूपी सरकार और उनके प्रशासन की ओर से किए गए हैं, वो बेहद निंदनीय है, लेकिन इसके बावजूद भी अब तक शंकराचार्य से माफी नहीं मांगी गई, यह कहीं न कहीं गंभीर सवाल खड़े करते हैं.
– स्वामी प्रबोधानंद गिरि, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, भारत साधु समाज

क्या था मामला?
गौर हो कि बीती 18 जनवरी को प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के काफिले को पुलिस ने संगम तट पर जाने से रोक दिया था, जिससे मेला क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी. काफिले को रोकने पर समर्थकों और पुलिस के बीच बहस भी हुई और देखते ही देखते धक्का-मुक्की तक होने लगी. जिससे मामला गरमा गया.

उधर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर शिष्यों के साथ मौनी अमावस्या के दिन बैरिकेडिंग तोड़ने का आरोप लगाया गया है. इसके बाद शंकराचार्य माघ मेला के सेक्टर 4 स्थित शिविर के बाहर अपने अनुयायियों के साथ पिछले तीन दिनों से पालकी पर ही बैठे हैं. वहीं, प्रयागराज माघ मेला विकास प्राधिकरण उनके शिविर के बाहर उनकी पदवी को लेकर नोटिस चस्पा किया गया है. जिसमे 24 घंटे के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है.

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