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UGC के नए नियम से BJP में ‘बगावत’, देश भर में विरोध तेज, इस्तीफों की झड़ी, बताया ‘काला कानून’

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नई दिल्ली, 28 जनवरी। उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लागू किए गए यूजीसी के नए नियमों (रेगुलेशन 2026) ने भारतीय जनता पार्टी के अंदर नाराजगी का माहौल बना दिया है. ‘सबका साथ-सबका विकास’ का नारा देने वाली मोदी सरकार अब अपने ही कैडर के गुस्से का सामना कर रही है. हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक इस्तीफों की झड़ी लग गई है. सरकार के मंत्री और सांसद की ‘सफाई’ भी काम नहीं आ रही है.

उत्तर प्रदेश बना बगावत का केंद्र
यूजीसी के इस नए नियम को बीजेपी के ही जमीनी नेता “ब्लैक लॉ” (काला कानून) करार दे रहे हैं. नोएडा में बीजेपी युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजू पंडित ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि यह कानून भेदभावपूर्ण है. वहीं, लखनऊ में बगावत और गहरी हो गई जब मंडल महामंत्री सहित 11 पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया.

बगावत की यह आग रायबरेली और श्रावस्ती तक फैल गई है, जहां किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी और बीजेपी टीचर्स सेल के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर ने पदों को लात मार दी. सरकारी महकमे में भी इसकी धमक दिखी, जब बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सवर्ण छात्रों के अधिकारों का हनन बताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

विधायकों के तीखे सुर और कुमार विश्वास का तंज
बीजेपी के अंदरुनी हालात इतने खराब हैं कि पार्टी के विधायक भी अब खुलकर सरकार के “दोहरे मापदंड” पर सवाल उठा रहे हैं. बीजेपी विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने नियमों में तुरंत संशोधन की मांग की है. वहीं, अक्सर सरकार की तारीफ करने वाले कवि कुमार विश्वास ने भी इस मुद्दे पर तंज कसते हुए सरकार को आईना दिखाया है, जिससे बीजेपी की फजीहत और बढ़ गई है.

एबीवीपी की ‘चुप्पी’ और एनएसयूआई का हमला
इस पूरे विवाद में बीजेपी की छात्र शाखा एबीवीपी (ABVP) की स्थिति ‘सांप-छछूंदर’ जैसी हो गई है. संगठन ने दबी जुबान में नियमों को “संतुलित” करने की मांग की है. दूसरी ओर, विपक्षी खेमे की एनएसयूआई (NSUI) ने इन नियमों का स्वागत कर बीजेपी को वैचारिक रूप से और भी मुश्किल में डाल दिया है. कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने संसद के बजट सत्र से पहले चुटकी लेते हुए कहा, “बीजेपी के अंदर ही भीषण युद्ध छिड़ा है, पहले बीजेपी अपनी स्थिति स्पष्ट करे.”

सफाई में जुटे शिक्षा मंत्री, पार्टी प्रवक्ता मौन
हालात बिगड़ते देख शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और सांसद निशिकांत दुबे ने मंगलवार को सफाई देने की कोशिश की. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा. बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि गलतफहमियां दूर होंगी. हालांकि बीजेपी के कोई भी प्रवक्ता इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से बच रहे हैं.

क्या है विवाद की जड़?
विरोध करने वालों का सीधा आरोप है कि यूजीसी के नए नियमों में झूठी शिकायतों पर सजा का कोई प्रावधान नहीं है. आरोप है कि यह कानून सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ “रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन” को बढ़ावा देगा और उनकी सुरक्षा को खत्म कर देगा.

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