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CBSE का 12वीं बोर्ड की आंसरशीट्स का मूल्यांकन ऑन-स्क्रीन मार्किंग नियम से शुरू करने का फैसला

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नई दिल्ली, 10 फरवरी। सीबीएसई ने 12वीं बोर्ड परीक्षा की मार्किंग स्कीम में बड़ा बदलाव किया है। 12वीं बोर्ड परीक्षा के पेपर्स अब नई मार्किंग सिस्टम से चेक किए जाएंगे। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in नोटिस जारी कर इसकी जानकारी दी है। सीबीएसई के इस बदलाव का असर सीधे इंटरमीडिएट के 16 लाख से अधिक स्टूडेंट्स के पेपर्स पर पड़ेगा।

10वीं बोर्ड परीक्षाओं पर यह नियम नहीं होगा लागू
सीबीएसई ने नोटिस जारी कर बताया कि बोर्ड ने 2026 की परीक्षाओं से 12वीं क्लास की आंसरशीट्स का मूल्यांकन करने के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (On-Screen Marking या OSM) शुरू करने का फैसला लिया है। बोर्ड ने कुशलता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया है। हालांकि सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षाओं की आंसरशीट्स का असेसमेंट पुराने फिजिकल मोड में ही जारी रहेगा।

सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) क्या है?
यह सीबीएसई की नई डिजिटल असेसमेंट प्रक्रिया है, जो फिलहाल 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के पेपर चेक करने के लिए अपनाई जाएगी। इसमें आंसरशीट्स को पुराने फिजिकल मोड के बजाय कंप्यूटर स्क्रीन पर चेक किया जा सकेगा। परीक्षाओं के बाद स्टूडेंट्स की आंसरशीट्स को स्कैन किया जाएगा और उन्हें डिजिटल फाइल में बदला जाएगा। इस डिजिटल फाइल को एग्जामिनर या टीचर्स अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर ओपन करके चेक कर सकेंगे। इस प्रक्रिया में स्क्रीन पर ही मार्किंग होगी, हर एक सवाल के लिए मार्क्स एड किए जाएंगे और सिस्टम ऑटोमैटिक ओवर मार्क्स जोड़ लेगा।

CBSE की नई डिजिटल असेसमेंट प्रक्रिया (OSM) के फायदे
टोटलिंग एरर नहीं- मैनुअल ढंग से जोड़ने-घटने के बजाय ऑटोमैटिकली कैलकुलेट करेगा। इससे टोटलिंग एरर खत्म हो जाएगा।
आंसरशीट्स ट्रांसपोर्टेशन नहीं- आंसरशीट्स को कहीं लाना-ले जाना नहीं पड़ेगा।
खास एग्जाम सेंटर्स की जरूरत खत्म- टीचर्स को किसी खास एग्जाम सेंटर्स पर नहीं पड़ेगा। वे अपने स्कूल में रहकर कंप्यूटर स्क्रीन पर कॉपी चेक कर सकेंगे।
वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं- डिजिटल तरीके से कॉपियां चेक होने से मार्क्स वेरिफिकेशन की जरूरत बहुत हद तक खत्म हो जाएगी। ह्यूमन रिसोर्स कम होगा।
पेपरलेस प्रक्रिया- ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पेपरलेस होगा और पर्यावरण को फायदा होगा।
समय और लागत की बचत- आंसरशीट्स को ट्रांसपोर्ट करने का झंझट खत्म हो जाएगा। इससे समय के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट की लागत भी बचेगी। साथ ही वो समय पेपर चेक करने में काम आएगा।

स्कूलों के लिए जरूरी निर्देश
स्कलों को ऑन-स्क्रीन मार्किंग के लिए पब्लिक स्टैटिक IP वाला कंप्यूटर लैब (एफिलिएशन बाय-लॉज के अनुसार) सेट-अप तैयार करना होगा।
Windows 0S 8 या उससे ऊपर का PC/लैपटॉप, 4 GB RAM या उससे ज्यादा और C:/ ड्राइव पर 1 GB खाली जगह होनी चाहिए।
लेटेस्ट इंटरनेट ब्राउजर (Chrome/Edge/E/Firefox) होना चाहिए।
एडोब रीडर (https:llget.adobe.com/reader से डाउनलोड किया जा सकता है) होना चाहिए।
भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्टिविटी (कम से कम 2 Mbps) जरूरी है।
बिना रुकावट बिजली की सप्लाई का इंतजाम करना होगा।

सीबीएसई ने स्कूलों को OASIS ID वाले सभी टीचर्स को लॉग-इन करने और सिस्टम को समझाने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करने को कहा है। अगर कोई समस्या आती है तो खास हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके मदद ले सकते हैं। इसके अलावा इंस्ट्रक्शनल वीडियो से समझाया जाएगा। बोर्ड ने 13 फरवरी 2026 शाम 4 बजे तक OASIS पोर्टल पर टीचर्स का डेटा अपडेट करने को कहा है। ऐसा नहीं करने वाले स्कूल का रिजल्ट रोका भी जा सकता है। बोर्ड ने स्कूलों से साफ कहा कि अगर किसी तरह की लापरवाही देखी गई तो वह सीधे तौर पर बोर्ड एग्जाम पेपर मूल्यांकन प्रक्रिया को बिगाड़ने की कोशिश मानी जाएगी और नियमों के तहत कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।

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