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त्रियुगीनारायण मंदिर में देशभर से पहुंचे 15 जोड़ों ने महाशिवरात्रि के पावन मुहूर्त में रचाई शादी

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फाटा (रुद्रप्रयाग), 15 फरवरी। शिव पार्वती विवाह स्थल त्रियुगीनारायण में महाशिवरात्रि के पर्व पर बड़ी संख्या में भक्त दर्शनों को पहुंचे। वहीं इस शुभ मुहूर्त पर 15 नवयुगल शादी के बंधन में बंधे। त्रियुगीनारायण मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक हिंदू मंदिर है। आजकल यह मंदिर वेडिंग डेस्टिेशन के रूप में लोकप्रिय हो रहा है। लोग यहां आकर सादगी और आध्यात्मिक रीति रिवाजों से विवाह करना पसंद करते हैं।

महाशिवरात्रि पर सुबह से ही त्रियुगीनारायण में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शनों और जलाभिषेक को पहुंचे। वहीं उत्तराखंड के विभिन्न जिलों के साथ ही दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, बंगाल से नवयुगल इस पवित्र स्थान पर पहुंचे और महाशिवरात्रि पर शादी के बंधन में बंधे।

महाशिवरात्रि पर शादी के लिए पहुंचे दिल्ली निवासी गौरव और सोनाली ने कहा कि उन्होंने इस पवित्र स्थान का नाम सुना था और आज इस शुभ अवसर पर शादी के बंधन में बंधे। तीर्थ पुरोहित समिति त्रियुगीनारायण के सचिव सर्वेशानंद भट्ट ने बताया कि महाशिवरात्रि पर 15 नवयुगल शादी के बंधन में बंधे। वहीं श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा होने से पर्यटन व्यवसायियों के चेहरों पर रौनक रही। वहीं पर्यटन एवं तीर्थाटन को भी बढ़ावा मिल रहा है।

‘बम बम भोले’ के जयकारों से गूंजे शिवालय
महाशिवरात्रि पर जनपद के शिवालयों में दिनभर भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। मंदिरों में ‘बम बम भोले’ के जयकारों से गूंजते रहे। वहीं पंचकेदार शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में पूरे दिनभर क्षेत्र का पूरा वातावरण शिवमय बना रहा। भक्तों ने भोले बाबा की पूजा-अर्चना कर जलाभिषेक कर मनौतियां भी मांगी। इस दौरान मंदिरों में सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए पुलिस की व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रहीं।

भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह स्थल
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह स्थल माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी स्थान पर हिमालय के राजा हिमवान की पुत्री पार्वती और शिव का विवाह संपन्न हुआ था। यहां पर एक अग्निकुंड है, जिसके फेरे शिव पार्वती ने लिये थे। इसी कारण इस मंदिर को अखंड धुनी मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर के पास चार पवित्र कुंड- ब्रह्म कुंड, रुद्र कुंड, विष्णु कुंड और सरस्वती कुंड स्थित है।

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