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यूजीसी के नए नियमों के विरोध में मशाल लेकर सैकड़ों संत सड़क पर उतरे, सरकार को चेताया

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हरिद्वार, 18 फरवरी। अखंड परशुराम अखाड़े के नेतृत्व में सवर्ण समाज के लोगों ने यूजीसी से जुड़े नए प्रावधानों के विरोध में मशाल जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया. साथ ही सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर कानून वापस लेने की मांग उठाई. इस दौरान उन्होंने आगामी 8 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित सभा में बड़ी संख्या में पहुंचने का आह्वान भी किया.

‘भारत सरकार होश में आओ, काला कानून वापस लो’
दरअसल, जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर और डासना पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरी समेत सैकड़ों लोगों ने हाथों में मशाल लेकर खन्ना नगर से लेकर ऋषिकुल मैदान तक जुलूस निकाला. साथ ही नारेबाजी कर यूजीसी के नए नियमों का विरोध किया. इस दौरान यति नरसिंहानंद गिरी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां हिंदू समाज को बांटने वाली हैं. सैकड़ों लोग ‘भारत सरकार होश में आओ, काला कानून वापस लो’ आदि जैसे कई नारे लगा रहे थे।

सवर्ण हितों के विरुद्ध है यूजीसी के नये नियम
उन्होंने कहा कि यूजीसी से संबंधित नया कानून सवर्ण समाज के हितों के विरुद्ध है और इससे सामाजिक विभाजन की स्थिति उत्पन्न होगी. हिंदू समाज को एकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए. आगामी आठ मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में यूजीसी के नए नियमों के विरोध में महा आंदोलन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में साधु संत और सवर्ण समाज के लोग शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि सरकार को यह काला कानून वापस लेना ही होगा.

यूजीसी के नए नियम स्वीकार नहीं


वहीं, श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से लाया गया नया कानून सवर्ण समाज के बच्चों के भविष्य के लिए घातक है. यूजीसी के इन नए नियमों को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने की बात करने वाली सरकार ने स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भेदभाव की खाई पैदा कर दी है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस पर लगाई गई रोक का स्वागत किया, लेकिन स्पष्ट किया कि जब तक कानून पूरी तरह निरस्त नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. स्वर्ण समाज के आक्रोश का प्रतीक है मशाल जुलूस: वहीं, कथावाचक पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मशाल जुलूस स्वर्ण समाज के आक्रोश का प्रतीक है. आगे भी चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा. जब तक यह कानून वापस नहीं होता, तब तक विरोध जारी रहेगा.

दरअसल, इसी साल जनवरी महीने में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के विनियम 2026 नियम जारी किया था. यह नियम उच्च शिक्षा (कॉलेजों/विश्वविद्यालयों) में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए लाया गया है, लेकिन इसको लेकर देशभर में विवाद खड़ा हो गया. यूजीसी के इस नियम को लेकर देश में लगातार जातिगत विवाद बढ़ रहा था. इतना ही नहीं देशभर में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होने लगे. ऐसे में यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. जहां बीती 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर फिलहाल के लिए रोक ला दी.

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