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28 अगस्त को मनाया जायेगा रक्षाबंधन, भद्रा के साये से मुक्त रहेगा भाई-बहन के स्नेह का पर्व

नई दिल्ली, 22 अगस्त, 26. हिंदू धर्म में रक्षाबंधन का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है और इस दिन को मुख्य रूप से भाई और बहन के बीच प्यार और स्नेह का पर्व माना जाता है। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा काल का साया नहीं रहेगा, जिससे राखी बांधने के लिए सुबह का समय बेहद शुभ है।

इस पर्व पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी खुशी के साथ तरक्की के लिए प्रार्थना करती हैं, वहीं भाई अपनी बहनों की रक्षा करने और अच्छे-बुरे हर समय में उनके साथ खड़े रहने का वचन देते हैं। यह पर्व हर साल सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे से शुरू होकर 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे तक रहेगी।

रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का साया
इस साल रक्षाबंधन के ही दिन चंद्र ग्रहण भी है। 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को चंद्रमा लगभग पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आ जाएगा। इस साल सावन की पूर्णिमा के दिन ही चंद्रग्रहण भी पड़ रहा है जिसकी वजह से इस पर्व की सही तिथि को लेकर मन में शंका बनी हुई है। चंद्र ग्रहण की वजह से सभी के मन में यह सवाल है कि रक्षाबंधन इस साल 27 अगस्त को मनाया जाएगा या 28 अगस्त को? यह एक आंशिक चंद्रग्रहण होगा और इसका असर भारत में नहीं दिखाई देगा और इसी वजह से सूतक काल भी मान्य नहीं है।

रक्षाबंधन 2026 कब है?

(Raksha Bandhan 2026 Date)हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि इस साल 28 अगस्त को पड़ेगी।सावन पूर्णिमा तिथि आरंभ- 27 अगस्त 2026 प्रातः 9:08 बजे सेसावन पूर्णिमा तिथि समापन- 28 अगस्त प्रातः 9:48 बजे उदया तिथि की मानें तो इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाना ही शुभ होगा।

राखी बांधने का शुभ समय क्या है?
रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने का सबसे अच्छा मुहूर्त 28 अगस्त को प्रातः 6:23 बजे से प्रातः 9:48 बजे तक रहेगा। अगर आप इस मुहूर्त में राखी न भी बांध पाएं तो अभिजीत मुहूर्त में भी राखी बांधी जा सकती है। यह मुहूर्त 28 अगस्त दोपहर 12:14 बजे से 1:05 बजे तक रहेगा।

रक्षाबंधन पर भद्राकाल का समय क्या है?
रक्षाबंधन का पर्व हमेशा ऐसे समय में मनाया जाता है जिस समय भद्रा न लगा हो। इस साल भद्रा 27 अगस्त को प्रातः 9 बजकर 08 मिनट से रात 9 बजकर 32 मिनट तक है। ऐसे में जिस दिन रक्षाबंधन की मुख्य तिथि है यानी कि 28 अगस्त को पूरे दिन भद्रा का साया नहीं है। भद्रा काल 27 अगस्त को ही समाप्त हो जायेगा।

हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण का सूतक तभी मान्य होता है जब ग्रहण पूर्ण रूप से दिखाई देता है। वहीं जिस समय चंद्र ग्रहण लग रहा होता है उस समय जहां भी यह दिखाई देता है उसी स्थान पर इसका प्रभाव भी होता है और सूतक भी मान्य माना जाता है। चूंकि रक्षाबंधन के दिन पड़ने वाला सूर्यग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए त्योहार पर इसका कोई बुरा असर नहीं होगा।

आप भी यहां बताए शुभ मुहूर्त के अनुसार राखी का त्योहार मना सकते हैं और भाई बहन के बंधन को अटूट बना सकते हैं।

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