खेलदेश-विदेशमनोरंजनयूथ कार्नर

IPL में बल्ले से तहलका मचाने वाले वैभव के लिए सिर्फ रन बनाना ही काफी नहीं, अब करना होगा मौके का इंतजार

स्पोर्ट्स डेस्क. IPL में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन, 15 साल की उम्र में दुनिया भर में चर्चा, लेकिन टीम इंडिया की प्लेइंग-11 में जगह अब भी पक्की नहीं. वैभव सूर्यवंशी के सामने अब सिर्फ बल्ले से रन बनाने की चुनौती नहीं, बल्कि उस इंतजार को स्वीकार करने का इम्तिहान भी है, जो हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी के करियर में आता है.

क्रिकेट में कभी-कभी सबसे मुश्किल मुकाबला गेंदबाजों के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने मौके का इंतजार करते हुए खुद को तैयार रखने का होता है. वैभव सूर्यवंशी आज कुछ ऐसी ही स्थिति से गुजर रहे हैं. इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में अपने बल्ले से तहलका मचाने वाले इस किशोर खिलाड़ी से हर कोई टीम इंडिया की जर्सी में धमाका देखने को बेताब है. लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट की दुनिया में प्रतिभा के साथ धैर्य, सही समय और टीम की जरूरतों को समझना भी जरूरी है.

पूर्व भारतीय क्रिकेटर मुरली कार्तिक ने वैभव के मौजूदा हालात को इसी नजरिए से देखने की सलाह दी है. कार्तिक का संदेश साफ है- किसी खिलाड़ी को सिर्फ इसलिए प्लेइंग-11 से बाहर नहीं किया जा सकता कि कोई दूसरा खिलाड़ी उससे भी ज्यादा रोमांचक प्रतिभा के रूप में सामने आया है. वैभव के लिए यह बात सुनना शायद आसान न हो, लेकिन टीम इंडिया में जगह बनाने की दौड़ में उन्हें इस हकीकत का सामना करना होगा.

‘बुरा लगेगा, लेकिन कड़वी हकीकत स्वीकार करनी होगी’
मुरली कार्तिक ने वैभव की स्थिति पर कहा, ‘अगर आपको किसी खिलाड़ी को कड़वा सच बताना है, तो बेहतर है कि आप उसे बता दें. हो सकता है कि उसे यह पसंद न आए. कुछ समय तक यह बात उसे अच्छी न लगे, लेकिन हकीकत यही है. आपको इसे स्वीकार करना होगा और आगे बढ़ना होगा.’

यह टिप्पणी वैभव की प्रतिभा पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि इंटरनेशनल क्रिकेट में चयन की उस प्रक्रिया की ओर इशारा करती है, जहां अच्छे प्रदर्शन के बावजूद हर खिलाड़ी को तुरंत नियमित जगह नहीं मिलती. IPL में रिकॉर्ड बनाना और भारतीय टीम की प्लेइंग-11 में अपनी जगह पक्की करना दो अलग-अलग चुनौतियां हैं. वैभव ने अपनी बल्लेबाजी से उम्मीदों को जिस ऊंचाई पर पहुंचाया है, उसके बाद उन्हें हर मैच में खेलते देखने की इच्छा स्वाभाविक है. लेकिन टीम मैनेजमेंट को किसी युवा खिलाड़ी की संभावनाओं के साथ-साथ मौजूदा खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टीम के संयोजन को भी ध्यान में रखना पड़ता है.

अभिषेक-संजू की जोड़ी को हटाना इतना आसान नहीं
भारतीय टीम के सामने फिलहाल सबसे बड़ा सवाल ओपनिंग कॉम्बिनेशन का है. अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन जैसे बल्लेबाजों को टीम मैनेजमेंट पहले ही आजमा चुका है. दोनों 2026 टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं. ऐसे में सिर्फ वैभव को मौका देने के लिए स्थापित खिलाड़ियों को बाहर करना आसान फैसला नहीं होगा.

कार्तिक ने भी इसी बात पर जोर दिया. उन्होंने कहा, ‘मैं उन लोगों में से नहीं हूं, जो सिर्फ बदलाव करने के लिए बदलाव करते हैं. बदलाव लगातार होते रहते हैं, लेकिन उसके पीछे सही वजह होनी चाहिए. भारतीय टीम की ओपनिंग जोड़ी की बात करें, तो मैं जानता हूं कि उनका प्रदर्शन थोड़ा असंगत रहा है, लेकिन इसी जोड़ी ने आपको मैच भी जिताए हैं.’

यशस्वी जायसवाल की मिसाल, प्रतिभा के बावजूद इंतजार
मुरली कार्तिक ने वैभव की स्थिति की तुलना यशस्वी जायसवाल से भी की. उनका इशारा इस ओर था कि सीमित ओवरों के क्रिकेट में प्रतिभाशाली ओपनर होने के बावजूद नियमित जगह बनाना आसान नहीं होता, खासकर तब जब टीम में पहले से स्थापित खिलाड़ी मौजूद हों.

यह तुलना वैभव के लिए एक अहम सबक की तरह है. क्रिकेट में प्रतिभा किसी खिलाड़ी को चर्चा में ला सकती है, लेकिन टीम में उसकी जगह तय करने के लिए परिस्थितियां भी मायने रखती हैं. कभी टीम संयोजन आड़े आता है, तो कभी दूसरे खिलाड़ियों का प्रदर्शन. ऐसे में इंतजार करना करियर का अंत नहीं, बल्कि उसका एक कठिन दौर हो सकता है.

संजू की वापसी ने बढ़ाया मुकाबला
वैभव की राह में एक और पहलू संजू सैमसन का हालिया प्रदर्शन है. टी20 वर्ल्ड कप 2026 में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे संजू ने अपने पिछले 10 मैचों में चार अर्धशतक लगाए हैं. वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में भी उनके प्रदर्शन ने टीम में उनकी स्थिति को मजबूती दी है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं कि वैभव की संभावनाएं खत्म हो गई हैं. 15 साल की उम्र में जिस तरह उन्होंने IPL में अपनी पहचान बनाई है, वह बताता है कि उनके पास खुद को साबित करने का हुनर है. अब जरूरत इस प्रतिभा को सही समय पर सही दिशा देने की है.

असली इम्तिहान अब शुरू होता है
वैभव सूर्यवंशी के लिए यह दौर इसलिए भी अहम है, क्योंकि कम उम्र में मिली शोहरत के साथ उम्मीदों का दबाव भी बढ़ता है. हर मैच में उनसे बड़े प्रदर्शन की अपेक्षा की जाएगी और हर बार प्लेइंग-11 में जगह न मिलने पर सवाल उठेंगे. लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट में लंबा सफर तय करने के लिए इन दोनों स्थितियों से निपटना जरूरी है.

Related Articles

Back to top button