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उत्तराखंड के मदरसों में अब शुक्रवार नहीं रविवार को होगी छुट्टी, मदरसों के बच्चों ने मांगा हाफडे

देहरादून, 21 अक्टूबर, 26. उत्तराखंड के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में समान शैक्षिक व्यवस्था लागू करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है. जिसके तहत ‘उत्तराखंड मदरसा बोर्ड’ को बदलकर ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ लाया गया है. यह व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से प्रदेश में लागू भी हो गई है. ऐसे में राज्य सरकार ने एक ओर बड़ा निर्णय लिया है.

इसके तहत स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त मदरसों में अब शुक्रवार (जुमे) की जगह रविवार को साप्ताहिक अवकाश रखने के निर्देश दिए हैं. राज्य सरकार के इस निर्णय के बाद जहां एक ओर मदरसा में पढ़ने वाले बच्चे और पढ़ाने वाले टीचर जुमे के नमाज के लिए हाफ डे की मांग कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल कांग्रेस इसे ध्रुवीकरण की राजनीति करार दे रही है.

मदरसों में अब शुक्रवार को नहीं रविवार को होगी छुट्टी
दरअसल, उत्तराखंड सरकार ने मान्यता प्राप्त सभी मदरसों में शुक्रवार को होने वाले साप्ताहिक अवकाश को हटाकर रविवार को करने के निर्देश दिए हैं. हालांकि, इसके पीछे सरकार का तर्क है कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था का संचालन समान नियमों के आधार पर होना चाहिए. सरकार का उद्देश्य है कि सभी बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण एवं राष्ट्रीय पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है. ताकि, वे मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़कर भविष्य में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें.

इससे पहले ही सरकार ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उसके स्थान पर अल्पसंख्यक शिक्षा बोर्ड की व्यवस्था की है. इसके तहत मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी समेत विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थानों को निर्धारित शैक्षिक मानकों के अनुसार संचालित करने की व्यवस्था की गई है. उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड से 452 मदरसे मान्यता प्राप्त थे. ऐसे में नई व्यवस्था के तहत फिर से आवेदन करने वाले संस्थानों में से अब तक 76 को स्कूल के रूप में मान्यता मिल चुकी है. जबकि, 114 मदरसों के आवेदन शिक्षा विभाग में प्रक्रियाधीन हैं.

अब तक कितने मदरसों को मिल चुकी मान्यता?
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने बताया कि देहरादून में 6, हरिद्वार में 44, नैनीताल में 2 और उधम सिंह नगर में 24 संस्थानों को स्कूल के रूप में मान्यता दी जा चुकी है. मान्यता प्राप्त संस्थानों को शिक्षा विभाग और प्राधिकरण की ओर से निर्धारित सभी नियमों का पालन करना अनिवार्य है. इसमें साप्ताहिक अवकाश समेत शैक्षिक संचालन से संबंधित व्यवस्थाएं भी शामिल हैं.

उधर, मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों का कहना है कि ‘शुक्रवार को उन्हें हाफ डे से छुट्टी मिलनी चाहिए. क्योंकि, यह दीनी काम है. ताकि, वो नमाज पढ़ने के लिए अपनी तैयारियां कर सकें.’ फिलहाल, मामले को लेकर सियासत गरमा गई है. सरकार पहले ही उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को खत्म कर ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ ला चुकी है. जिसके तहत सभी मदरसों को शामिल किया जा रहा है.

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