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न्याय के देवता गोल्ज्यू महाराज की आराधना के साथ अल्मोड़ा में सात दिवसीय महोत्सव का आगाज

अल्मोड़ा, 22 अक्टूबर, 26. सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में गुरुवार को भव्य शोभायात्रा के साथ गोल्ज्यू महोत्सव का शुभारंभ हो गया. शोभायात्रा में स्थानीय कलाकारों के साथ ही बाहरी क्षेत्रों से पहुंचे सांस्कृतिक दलों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया. गोल्ज्यू महाराज के जयकारों से पूरा नगर गुंजायमान रहा. महोत्सव के आगाज के साथ ही नगर में उत्सव का माहौल बन गया. सात दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक विरासत और विविध सांस्कृतिक रंगों की झलक देखने को मिलेगी.

धार्मिक आस्था का केंद्र


न्याय के देवता के रूप में पूजे जाने वाले गोल्ज्यू महाराज के जयकारों से पूरा नगर गूंज उठता है। मल्ला महल में धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। महोत्सव के तहत मल्ला महल में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इन कार्यक्रमों के माध्यम से दर्शकों को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की लोक कला, पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा. महोत्सव में स्थानीय कलाकारों के साथ बाहरी क्षेत्रों से आए सांस्कृतिक दल भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे. गोल्ज्यू महाराज को ‘न्याय के देवता’ के रूप में जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि समाज में जब किसी व्यक्ति को सामान्य अदालतों या अन्य जगहों से न्याय नहीं मिलता, तब वह पूरी निष्ठा और विश्वास के साथ गोल्ज्यू दरबार में अर्जी लगाता है।

सांस्कृतिक विरासत और लोक संस्कृति का संरक्षण
सात दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक विरासत, लोक कला, वेशभूषा और लोक संगीत के विविध रंग देखने को मिलते हैं।  गोल्ज्यू महोत्सव को अल्मोड़ा की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है. आयोजन से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंच मिलता है. वहीं विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों की भागीदारी से सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा. इसके साथ ही नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा.

युवाओं को जोड़ना और मंच प्रदान करना
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं से जोड़ना है, साथ ही स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए एक बड़ा मंच प्रदान करना है। महोत्सव के आयोजक प्रकाश बिष्ट ने बताया कि गोल्ज्यू महोत्सव का मुख्य उद्देश्य धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को युवाओं से जोड़कर आगे बढ़ाना है. इसके साथ ही स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और लोक संस्कृति को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के साथ ही उसे नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. 28 अक्टूबर तक चलने वाले इस महोत्सव के दौरान मल्ला महल सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहेगा.

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