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24,400 में से 18,300 अग्निवीर हो जाएंगे बाहर, 6,100 की पर्मानेंट भर्ती, प्रत्येक को मिलेंगे 11.71 लाख

हैदराबाद, 30 अक्टूबर, 26. चार साल पहले देशभक्ति का जोश और जज्बा लिए 24,400 नौजवान अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सेना में अग्निवीर के तौर पर भर्ती हुए थे. पहले बैच के इन नौजवानों की सेना से अब विदाई का समय आ गया है. नियम के मुताबिक, 75 फीसदी यानी 18,300 जवान दिसंबर 2026 में सेना से बाहर होंगे.

कितने अग्निवीरों को सेना में पर्मानेंट कमीशन मिला
अग्निपथ योजना की शुरुआत जून 2022 में रक्षा मंत्रालय की ओर से की गई थी. नोटिफिकेशन में पहले वर्ष 46,000 अग्निवीरों की भर्ती का लक्ष्य रखा था. हालांकि, हालिया रक्षा रिपोर्टों के अनुसार, पहले बैच के तहत वास्तव में 24,400 अग्निवीरों ने सफलतापूर्वक अपनी सेवा शुरू की, जिनमें से 25% को स्थायी कमीशन दिया गया है. यानी 6,100 की सेना में पर्मानेंट भर्ती हो गई. बाकी 75% यानी 18,300 की सेना से विदाई हो जाएगी.

अग्निवीर को कितनी मिलती सैलरी
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए अग्निवीरों की पहले 30,000 दूसरे साल 33,000, तीसरे साल 36,500 और चौथे साल 40,000 रुपए महीना कुल सैलरी होती है. इसमें इनहैंड 70% आती है. बाकी 30% हिस्सा सेवा निधि में जमा होता है. जितना सेवा निधि में अग्निवीर का हिस्सा जाता है उतना ही सरकार की तरफ से भी दिया जाता है. 4 साल में जो कुल सेवा निधि जमा होती है उसे अग्निवीर को सेना छोड़ते समय दे दिया जाता है.

सेना छोड़ते समय अग्निवीर को मिलेंगे 11.71 लाख रुपए
अग्निवीर की 4 साल के सर्विस पीरियड में बेसिक सैलरी हर साल बढ़ती है. सैलरी का 30% हिस्सा सेवा निधि में कटता है और उतना ही सरकार अपनी तरफ से मिलाती है. 4 साल की नौकरी पूरी होने के बाद जिन 75% जवानों की सेवा समाप्त हो रही है, उन्हें 11.71 लाख रुपए सेवा निधि के दिए जाएंगे.

सेवा निधि पैकेज एक खास 30-30 फॉर्मूले और उस पर मिलने वाले चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) की वजह से बनता है. इस फॉर्मूले के तहत 4 साल में एक अग्निवीर की सैलरी से सेवा निधि में जो हिस्सा गया वह 5.02 लाख रुपए हुआ. इतना ही सरकार की तरफ से सेवा निधि में मिलाया गया. दोनों का मिलाकर 10.04 लाख रुपए हुआ. इसमें पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) की दर से कंपाउंडिंग ब्याज जो लगा, उसे जोड़कर यह 11.71 लाख रुपए हो जाता है.

अग्निवीरों को कोई पेंशन नहीं मिलेगी
अग्निपथ योजना के नियमों के अनुसार, 4 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद सेवा से बाहर होने वाले 75% अग्निवीरों को कोई भी पेंशन या ग्रेच्युटी (Gratuity) नहीं मिलेगी. सिर्फ एकमुश्त सेवा निधि मिलेगी. जो पूरी तरह से टैक्स-फ्री होगी. पेंशन सिर्फ उन 25% अग्निवीरों को मिलेगी जो सेना में स्थाई कैडर के रूप में प्रमोट हो जाएंगे. इन्हें सेना के नियमित नियमों के अनुसार आगे जाकर पेंशन की पात्रता होगी. अग्निवीरों को पूर्व-सैनिकों (Ex-servicemen) की तरह आजीवन मिलने वाली मेडिकल (ECHS) और कैंटीन सुविधाएं भी नहीं मिलेंगी.

आग्निवीरों के पास सेना के बाद जॉब के क्या ऑप्शन
सेना में 4 साल के सेवाकाल के बाद अग्निवीरों के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और प्राइवेट सेक्टर ने मिलकर रोजगार के कई विकल्प तैयार किए हैं. साथ ही आरक्षण की सुविधा भी इन पूर्व अग्निवीरों को मिलेगी.

अर्धसैनिक बल और असम राइफल्स में एंट्री
गृह मंत्रालय के नए नियमों के तहत सेवानिवृत्त अग्निवीरों के लिए यह सबसे बड़ा सुरक्षित रास्ता है. केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों जैसे BSF, CRPF, CISF, ITBP और असम राइफल्स में कांस्टेबल/राइफलमैन पदों के लिए 50% सीटें इनके लिए आरक्षित की गई हैं. सबसे बड़ा फायदा यह है कि इन्हें लिखित परीक्षा, फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST) और फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) देने की जरूरत नहीं होगी. इन्हें सीधे प्राथमिकता मिलेगी. साथ ही अधिकतम उम्र सीमा में 5 वर्ष की अतिरिक्त छूट भी रहेगी.

राज्य पुलिस और यूनिफॉर्म सर्विसेज में आरक्षण
देश के लगभग सभी प्रमुख राज्यों ने अपने पुलिस विभागों में अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की घोषणा की है. हरियाणा, सिक्किम, दिल्ली और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों ने पुलिस, जेल वार्डर और फायर सर्विस में 20% तक का कोटा तय किया है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और असम ने भी 10% से 12% तक का आरक्षण या पुलिस भर्ती में विशेष बोनस अंक देने का नियम बनाया है.

भारतीय रेलवे और रक्षा पीएसयू में आरक्षण
रेलवे ने पूर्व-अग्निवीरों के लिए लेवल-1 पदों में 10% और लेवल-2 या उससे ऊपर के गैर-राजपत्रित (Non-Gazetted) पदों में 5% आरक्षण दिया है. साथ ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में भी 10% कोटे की घोषणा की है. रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले 16 डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स जैसे HAL, BEL, मझगांव डॉक और कोस्ट गार्ड में 10% आरक्षण का प्रावधान है. ब्रह्मोस एयरोस्पेस (BrahMos Aerospace) जैसी बड़ी कंपनी ने तकनीकी भूमिकाओं में 15% और प्रशासनिक भूमिकाओं में 50% पद अग्निवीरों के लिए आरक्षित किए हैं.

कॉर्पोरेट और प्राइवेट सेक्टर मिलेगी प्राथमिकता
मल्टीनेशनल कंपनियों और बड़े बिजनेस घरानों ने अग्निवीरों के लिए विशेष घोषणाएं की हैं. टाटा संस (Tata Sons), महिंद्रा ग्रुप (Mahindra), आरपीजी ग्रुप (RPG) और रिलायंस जैसी कंपनियों ने घोषणा की है कि वे ऑपरेशन्स, एडमिनिस्ट्रेशन, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, सिक्योरिटी और लॉजिस्टिक्स में पूर्व-अग्निवीरों को प्राथमिकता देंगे. जहाजरानी मंत्रालय की विशेष पहल के कारण अग्निवीर बहुत आसानी से मर्चेंट नेवी में छह अलग-अलग शाखाओं में करियर बना सकेंगे.

सेवामुक्ति से पहले अग्निवीरों को मिलेंगे 3 महत्वपूर्ण सर्टिफिकेट
अग्निवीरों को 4 साल का सेवाकाल सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद 3 महत्वपूर्ण सर्टिफिकेट दिए जाएंगे. जो उनके भविष्य और करियर के लिए बेहद मूल्यवान हो सकते हैं. इनमें पहला है, अग्निवीर कौशल प्रमाण पत्र (Agniveer Skill Certificate). यह रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (NCVET) की ओर से संयुक्त रूप से जारी एक विस्तृत डिजिटल स्किल प्रोफाइल है जो सबसे महत्वपूर्ण सर्टिफिकेट माना जाता है. कॉर्पोरेट और प्राइवेट सेक्टर में नौकरी दिलाने में ये सर्टिफिकेट मदद करेगा. इसमें सेना में सीखे गए तकनीकी कौशल, कार्य अनुभव, नेतृत्व क्षमता और अनुशासन का पूरा ब्योरा होगा.

अग्निवीरों को 12वीं कक्षा के समकक्ष प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा. जो युवा 10वीं पास करके सेना में भर्ती हुए थे, उनकी पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए यह व्यवस्था की गई है. ये केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और इग्नू (IGNOU)/एनआईओएस (NIOS) के सहयोग से तैयार सर्टिफिकेट होता है. इसके जरिए वे उच्च शिक्षा या अन्य सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन कर सकेंगे.

तीसरा दस्तावेज विस्तृत डिस्चार्ज सर्टिफिकेट होता है जो अग्निवीरों को दिया जाएगा. यह उनकी सैन्य सेवा का आधिकारिक सरकारी दस्तावेज होगा. इसे थल सेना, नौसेना या वायुसेना के संबंधित रिकॉर्ड ऑफिस की ओर से जारी किया जाएगा. पुलिस भर्तियों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और सरकारी बैंकों में मिलने वाले आरक्षण (Quota) और उम्र में छूट का लाभ उठाने के लिए यह सर्टिफिकेट सबसे जरूरी दस्तावेज होगा.

अग्निवीरों को स्वरोजगार के लिए आसानी से मिलेगा लोन
जो अग्निवीर नौकरी के बजाय अपना खुद का काम शुरू करना चाहते हैं, उन्हें सेवा निधि के ₹11.71 लाख के साथ-साथ MSME और बैंकों से बेहद कम ब्याज दरों पर बिजनेस लोन (Loan Priority) की सुविधा भी मिलेगी. वहीं, पढ़ाई जारी रखने वालों के लिए इग्नू (IGNOU) से सीधे 3 साल का ग्रेजुएशन डिग्री कोर्स करने का भी विकल्प मिलेगा.

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