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जून 2026 तक सभी घरों में लग जाएगा स्मार्ट मीटर, उपभोक्ता परेशान, बिलिंग पर उठ रहे सवाल

देहरादून, 13 सितम्बर। उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर योजना सिरदर्द साबित हो रही है। ऊर्जा निगम (यूपीसीएल) की ओर से रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत तेजी से स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, लेकिन उपभोक्ताओं का आरोप है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है।
लोगों का कहना है कि बिना सूचना दिए पुराने मीटर उतारकर नए स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। न तो उन्हें सीलिंग सर्टिफिकेट सौंपा जा रहा है और न ही अंतिम रीडिंग का रिकॉर्ड दिया जा रहा है। ऐसे में बिजली बिलों की रीडिंग में गड़बड़ियों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।
हाल ही में रायपुर रोड क्षेत्र में मीटर बदलने पहुंची ऊर्जा निगम की टीम बिना किसी वरिष्ठ अधिकारी और पहचान पत्र के मौके पर पहुंची। यही हाल मोहनपुर और स्मिथनगर जैसे इलाकों में भी देखने को मिला। सामाजिक कार्यकर्ता वीरू बिष्ट का कहना है कि उन्होंने इस विषय पर आरटीआई दाखिल की, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला।
स्मार्ट मीटरिंग के चीफ शेखर त्रिपाठी के अनुसार प्रदेशभर में अब तक 2.53 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं और जून 2026 तक सभी घरों में इन्हें लगाने का लक्ष्य है। हर दिन औसतन 1500 मीटर लगाए जा रहे हैं।
शिकायतों पर चुप ऊर्जा निगम
उपभोक्ताओं का आरोप है कि ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से शिकायतें दर्ज करने के बावजूद उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। यहां तक कि सीएम पोर्टल पर की गई शिकायतों का भी निस्तारण नहीं हो रहा। कई उपभोक्ताओं से कहा गया कि वे चेक मीटर लगवा लें, लेकिन यह प्रक्रिया कागजी झंझटों से भरी बताई जा रही है।

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