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देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की मौत पर सामाजिक संगठनों में आक्रोश, सरकार को घेरा

देहरादून, 29 दिसम्बर। बीती 9 दिसंबर को त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा के साथ हुई मारपीट फिर उसकी 26 दिसंबर को ग्राफिक एरा हॉस्पिटल में मौत के बाद तमाम संगठनों में आक्रोश देखने को मिल रहा है. सोशल मीडिया पर भी एंजेल की न्याय को लेकर कैंपेन चलाया जा रहा है. इसी मामले में देहरादून के सामाजिक संगठनों में भी आक्रोश देखने को मिला.

देहरादून शहर में मौजूद कई सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर देर शाम गांधी पार्क में एंजेल चकमा की हत्या पर न्याय मांगा और सरकार से गुहार लगाई कि वो प्रदेश में फैल रहे नफरत की राजनीति को कम करें. उनका कहना था कि जिस तरह से उत्तराखंड एक शांतिप्रिय राज्य के रूप में जाना जाता है, इसकी अबोहवा में नफरत ना फैलाएं.

गांधी पार्क में शामिल हुए सामाजिक संगठनों के लोग


देहरादून गांधी पार्क पर इकट्ठा हुए सामाजिक संगठनों में कई छात्रों और आम लोगों ने भी भाग लिया. वहीं, विशेष तौर से इस कैंडल मार्च में समाजसेवी अनूप नौटियाल, राज्य आंदोलनकारी रही कमला पंत, मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति के संयोजक लुशुन टोडरिया, प्रदीप सती के अलावा अलग-अलग सामाजिक संगठनों के साथ छात्र-छात्राएं, महिलाएं और युवा भी शामिल हुए.

ट्रासजेंटर के लोग भी शामिल हुए कैंडल मार्च में
ट्रांसजेंडर कम्युनिटी के लोग भी कैंडल मार्च में शामिल हुए. ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट ओशीन ने कहा कि देहरादून में पढ़ने वाले छात्र देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों से आते हैं. ऐसे में क्षेत्रवाद के दृष्टिकोण से बिल्कुल भी भेदभाव नहीं होना चाहिए. यह समाज के काले पहलू को दिखाता है. मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति के संयोजक लुशुन टोडरिया और प्रदीप सती भी इस कैंडल मार्च में शामिल हुए. प्रदीप सती ने कहा कि जिस तरह से पिछले एक दशक में नफरत की राजनीति ने देश में अपनी जड़ें मजबूत की है, तभी से इस तरह के मामले उग्र होने लगे हैं.

एंजेल चकमा के परिवार को भेजी गई आर्थिक मदद
इसके बाद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 एवं नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 के अंतर्गत यह आर्थिक सहायता स्वीकृत किया गया. फिर पहली किस्त का चेक एंजेल चकमा के पिता तरुण प्रसाद चकमा को भेज दिया गया है.  सीएम धामी के निर्देश पर एंजेल के पिता तरुण प्रसाद चकमा को तत्काल आर्थिक सहायता स्वीकृत कर पहली किश्त के रूप में 4 लाख 12 हजार 500 की आर्थिक सहायता जारी कर दी गई है. यह धनराशि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 एवं नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 के तहत स्वीकृत की गई है.

एंजेल चकमा के इलाज का खर्च वहन करेगी उत्तराखंड सरकार
सीएम धामी ने पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता देने का भरोसा दिलाया था. उन्होंने कहा था कि इस घटना पर वे व्यक्तिगत तौर पर दुखी हैं. साथ ही आश्वासन दिया था कि उत्तराखंड सरकार दोषियों को कड़ी सजा दिलाएगी. वहीं, दिवंगत एंजेल चकमा के इलाज के दौरान हुए समस्त चिकित्सीय खर्च अब उत्तराखंड सरकार वहन करेगी.

देहरादून में अध्ययनरत नॉर्थ ईस्ट के छात्र एंजेल चकमा की हत्या की घटना केवल एक छात्र की मौत नहीं, बल्कि एक परिवार के सपनों और उम्मीदों का असमय अंत है. कानून व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा उत्तराखंड सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

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