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नेगी जी के सुरों में हमेशा अमर रहेंगे ‘बंदूक्या जसपाल राणा’, ‘अखबार-टीवी मा बहुत सुण तेरो नाम….’

देहरादून, 12 जून। नब्बे के दशक में भारतीय निशानेबाजी में सिर्फ एक ही नाम सुनाई देता था और वो था शूटर जसपाल राणा का नाम. अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में जसपाल राणा ने ऐसी स्वर्णिम सफलताएं प्राप्त कीं कि वो शहरों के साथ ही गांवों में भी प्रसिद्ध हो गए. वो उत्तराखंड से थे तो यहां के आम जन मानस में उनके प्रदर्शन के बारे में जानने की बहुत उत्सुकता रहती थी. नई सदी यानी 2000 के शुरुआती सालों में जब उत्तराखंड में बाघ का आतंक हुआ तो लोकप्रिय गायक नरेंद्र सिंह नेगी को भी जसपाल राणा ही याद आए.

नब्बे के दशक में आसमान छूती थी जसपाल राणा की लोकप्रियता
नरेंद्र सिंह नेगी ने लोकप्रिय शूटिंग चैंपियन जसपाल राणा पर गीत लिखा. इस गीत को जब उन्होंने गाया तो ये उत्तराखंड में बहुत हिट हुआ. नरेंद्र सिंह नेगी ने इस गीत के माध्यम से शूटर जसपाल राणा से आतंक मचाने वाले आदमखोर बाघ को मारने की अपील की थी. यह गीत उनके मशहूर एलबम टपकारा में रिलीज हुआ था। गीत के बोल थे…

बंदूक्या जसपाल राणा सिस्त सादी दे
निशाणू सादी दे
उत्तराखंड मा बाघ लग्यूं
बाघ मारि दे

तोपची जसपाल राणा सिस्त सादी दे
निशाणू सादी दे
उत्तराखंड मा बाघ लग्यूं
बाघ मारि दे

भौत नाम सुणी तेरु अखबार
टीवी रेडियो मा
तोपची बड़ा-बड़ा हरेनी
तिन देशू-विदेश मा
आतंकवादी ये बाघे बी
सैकी झाड़ी दे

उत्तराखंड मा बाघ लग्यूं
बाघ मारी दे

लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने जसपाल राणा पर गीत गाया था
इस गीत से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड में शूटर जसपाल राणा की लोकप्रियता का आलम क्या था. नरेंद्र सिंह नेगी का वर्ष 2002 में गाया ये गीत बाघ और गुलदार के बढ़ते हमलों के बीच लोग आज भी गुनगुनाते हैं. ये गीत सिर्फ आतंक मचाने वाले बाघ को मारने के लिए आह्वान नहीं था, बल्कि देश और प्रदेश के लिए जसपाल राणा द्वारा शूटिंग में हासिल की गई उपलब्धियों को भी समर्पित था.

अपने खेल करियर में जसपाल राणा ने कई पदक जीते
दरअसल अपने खेल जीवन में जसपाल राणा ने मेडलों की ऐसी झड़ी लगाई थी कि लोग हैरान रह गए थे. उन्हें 10 मीटर एयर पिस्टल और 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल में महारत हासिल थी. जसपाल राणा ने अपने शूटिंग करियर में 15 स्वर्ण पदक सहित बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय पदक जीते थे.

खेल करियर के बाद सफल कोच रहे जसपाल राणा
सक्रिय खेल करियर के बाद वो एक शानदार कोच भी साबित हुए. उन्होंने ही शूटर मनु भाकर को तराशा. जसपाल राणा की ही ट्रेनिंग का कमाल था कि मनु भाकर ने ओलंपिक में दो मेडल जीते. मनु ने ये दोनों पदक 2024 के पेरिस ओलंपिक में जीते थे. जसपाल राणा भारतीय पिस्टल शूटर्स के हाई-परफॉर्मेंस कोच बने. मनु भाकर के साथ ही उन्होंने सौरभ चौधरी और अनिश भनवाला जैसे कई युवा निशानेबाजों को भी ट्रेनिंग दी.

शूटर जसपाल राणा अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री, द्रोणाचार्य सम्मान मिले
खेल में इन्हीं बड़ी उपलब्धियों के चलते जसपाल राणा को अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री और द्रोणाचार्य पुरस्कार मिले. बहुत कम आयु में जसपाल राणा दुनिया छोड़ गए, लेकिन अपने पीछे छोड़ गए सफलता की बड़ी विरासत जो उभरते खिलाड़ियों को सदा प्रेरणा देती रहेगी.

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