
देहरादून। उत्तराखंड-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में एक हफ्ते के दरम्यान दूसरी बार भूकंप के तेज झटके महसूस किये गये। बार-बार धरती में कंपन होने से सवाल उठने लगे हैं कि आखिर उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर में बार-बार भूकंप आने के पीछे क्या कारण है? आखिर पृथ्वी के नीचे क्या चल रहा है? कहीं ये किकी बड़े भूकंप की आहट तो नहीं?
शनिवार चार बजकर 25 मिनट पर भूकंप का पहला झटका लगा। जानकारी के अनुसार इसका केंद्र ऋषिकेश में था। वैसे शनिवार को तीन घंटे के अंतराल में दो बार धरती डोली। पहले उत्तरकाशी और फिर नेपाल में आए भूकंप के झटके पूरे देहरादून समेत पूरे राज्य में महसूस किये गये। दूसरी बार 7.57 पर आए भूकंप की तीव्रता 5.4 थी, जिसका केंद्र पिथौरागढ़ से सटे नेपाल इलाके में था।
उत्तराखंड और दिल्ली एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में एक हफ्ते में दूसरी बार आए भूकंप से लोग भयभीत हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड, दिल्ली-एनसीआर में कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है, हालांकि ये कब आएगा, इसकी पुष्टि अभी नहीं की गयी है। जवाहरलाल नेहरू साइंटिफिक रिसर्च में प्रो. सीपी राजेंद्रन का कहना है कि भारत के भाटपुर से लेकर नेपाल के मोहाना खोला तक 600 किमी लंबा सीसमिक गैप बना है, जो छह-सात सालों से शांत है। अगर ये भूकंप आएगा तो इसती तीव्रता 8.5 तक हो सकती है और तब कितनी बड़ी तबाही मचेगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। भूकंप को लेकर अध्ययन कर रहे आईआईटी कानपुर के प्रो. जावेद मलिक का कहना है कि भारत के लिए यह चिंताजनक स्थिति बन रही है।
भूकंप क्यों आता है?
वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी टैक्टोनिक प्लेटों पर टिकी हुई है। इसके नीचे तरल पदार्थ लावा है और इस पर टैक्टोनिक प्लेट तैरती रहती है। कई बार ये प्लेट्स आपस में टकरा जाती हैं। बार-बार टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और दबाव पड़ने से ये प्लेट्स टूटने लगती है। ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्ता खोजती है और जब उसमें व्यवधान आता है तो इसके बाद भूकंप आता है।
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