
मसूरी। कार्टोग्राफी से तात्पर्य मानचित्र कला से है। मानचित्र संबंधी उपकरणों, तकनीकों और सिद्धांतों के अध्यन को कार्टोग्राफी कहा जाता है। मसूरी में तैयार इस म्यूजियम का लोकापर्ण पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने किया।
4.5 करोड़ रुपये की लागत लगी है इसे तैयार करने में
ये देश का पहला कार्टोग्राफी म्यूजियम है। इससे उत्तराखंड को देश में अलग पहचान मिलेगी। सतपाल महाराज ने कहा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये बदरीनाथ से आगे माणा गांव को भी पर्यटन के क्षेत्र से की दिशा में विकसित किया जा रहा है। इस कार्टोग्राफी को तैयार करने में 4.5 करोड़ रुपये की लागत आयी है। मसूरी कार्टोग्राफी म्यूजियम देश का अनोखा म्यूजियम है, जहां जॉर्ज एवरेस्ट और उनके सहयोगियों की विभिन्न खोजों को दिखाया गया है।
इस म्यूजियम में नक्शों को तैयार करने वाले उपकरण भी रखे गये हैं। इसमें नये और पुराने जमाने के उपकरण शामिल हैं। इसमेें जॉर्ज एवरेस्ट का मोम का पुतला भी बनाया गया है। उनके साथियों के पुतलों के साथ ही उनकी जानकारी भी उनके साथ अंकित की गई है, जिससे नई पीढ़ी इन खोजकर्ताओं के बारे में जान सके।
पुराने जमाने की मानचित्रकारी का अद्भुत नमूना
दीवारों पर पुराने जमाने की मानचित्रकारी की तकनीकों को भी दिखाया गया. पहले कैसे कदमों से दूरी मापी जाती थी, उसके बाद उसे गणित के जरिये कागजों पर उतारा जाता था। मसूरी कार्टोग्राफी म्यूजियम में इसे चित्रों के माध्यम से दिखाने की भरपूर कोशिश की गई है। https://sarthakpahal.com/