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देश के पहले और उत्तराखंड के पांचवे धाम सैन्य धाम का लोकार्पण आखिरी पल में क्यों टला?

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देहरादून, 12 नवम्बर। उत्तराखंड सैन्य धाम का लोकार्पण पीएम मोदी के उत्तराखंड दौरे के बाद भी टल गया. पिछले दो सालों में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी कई बार सैन्य धाम के लोकार्पण का दावा कर चुके हैं. लेकिन यह दावा एक बार फिर से खोखला साबित हुआ. ऐसे में मंत्री जोशी के दावों पर कांग्रेस ने तंज कसना शुरू कर दिया है.

उत्तराखंड राज्य गठन के 25 साल पूरे होने पर 9 नवंबर को उत्तराखंड रजत जयंती समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्य अतिथि के तौर पर कई घोषणाएं और योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. उनके आने से पहले चर्चाएं थी कि पीएम मोदी उत्तराखंड में बने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट सैन्य धाम का लोकार्पण भी करेंगे. हालांकि, ये चर्चाएं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के दावों के बाद ही शुरू हुई थी. उन्होंने ये भी कहा था कि बिहार चुनाव के मद्देनजर पीएम मोदी उत्तराखंड नहीं आए तो लोकार्पण टल सकता है.

PM मोदी ने सैन्य धाम के लोकार्पण से किया किनारा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड राज्य स्थापना के दिन ही उत्तराखंड में कई योजना परियोजनाओं को लोकार्पण और शिलान्यास किया. इनमें सिंचाई, ऊर्जा सहित कई विभागों की छोटी-मोटी योजनाओं भी शामिल रहीं. लेकिन सैन्य धाम का लोकार्पण पीएम मोदी ने नहीं किया. अब गणेश जोशी इसके पीछे तर्क दे रहे हैं कि लिफ्ट का काम बाकी रह गया था.

सैन्य धाम निर्माण में अनियमितता को लेकर PMO में शिकायत
दूसरी तरफ इस लोकार्पण के न होने के पीछे वह तमाम शिकायतें हैं जो कि पहले ही प्रधानमंत्री कार्यालय में पहुंच चुकी थी. दरअसल, देहरादून में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी के विधानसभा क्षेत्र गुनियाल गांव में बन रहे सैन्य धाम उद्घाटन की चर्चाएं तेज हुईं, वैसे ही कई शिकायतें प्रधानमंत्री कार्यालय तक भी पहुंची. ये शिकायतें अधिवक्ता विकेश नेगी और पूर्व सैनिक मधुकांत ध्यानी ने पत्र लिखकर सैन्य धाम निर्माण में हुए भ्रष्टाचार को लेकर की थी.

एडवोकेट विकेश नेगी के मुताबिक, सैन्य धाम जिस भूमि पर बनाया गया है, वह भूमि वन विभाग की है. जिसे नियमानुसार स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कई तरह की अनियमितताओं का हवाला देते हुए राष्ट्रपति को भी पत्र भेजा था. पीम को लिखे पत्र में विकेश नेगी ने कहा था कि, जिस सैन्य धाम के उद्घाटन के लिए आप आ रहे हैं वह पूरी तरह से भ्रष्टाचार के तहत नियमों को ताक पर रखकर बनाया गया है. हालांकि सैनिक कल्याण विभाग के अधिकारी इन आरोपों को निराधार बता रहे हैं।

मुख्यमंत्री कर चुके भ्रष्टाचार की संभावना से इनकार
विवादों में घिरते सैन्य धाम को लेकर सीएम धामी भी पूर्व में बयान दे चुके हैं. पीएम मोदी के दौरे से पहले 31 अक्टूबर को दिए बयान में सीएम धामी ने भ्रष्टाचार या गड़बड़ी की संभावना से इनकार किया था. साथ ही कहा था कि निर्माण में सभी प्रक्रिया विधि संवत और व्यवस्था के तहत हुई हैं. अगर किसी के पास भ्रष्टाचार या गड़बड़ी के कोई सबूत हैं तो सरकार कार्रवाई करेगी.

भ्रष्टाचार की नींव पर सैन्य धाम का निर्माण: हरीश रावत
इस मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत कई बार बयान देकर सरकार को घेरने की कोशिश कर चुके हैं. 31 अक्टूबर को देहरादून में मीडिया को दिए बयान में हरीश रावत ने कहा था कि, जहां पर बलिदान और शौर्य गाथाओं का प्रतीक सैन्य धाम बनाया गया है उसी सैन्य धाम निर्माण की नींव भ्रष्टाचार पर रखी गई है. उन्होंने भूमि को लेकर भी सवाल खड़े किए और कहा कि खेत और नाले को घेर कर सैन्य धाम का निर्माण किया गया. इस तरह के विवाद इसकी गरिमा के लिए बेहद निंदनीय है.

सैन्य धाम की शुरुआत
15 दिसंबर 2021 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हाथों से देहरादून के गुनियाल गांव में सैन्य धाम की नींव रखी गई थी, जिसे अब बनते हुए 4 साल पूरे होने जा रहे हैं. शुरुआत में इसे 2 साल के अंदर तैयार करने का दावा किया गया था, लेकिन निर्माण कार्य अभी भी पूरा नहीं हुआ है. सैनिक कल्याण मंत्री द्वारा दावा किया गया कि जल्द ही कार्य पूरा हो जाएगा. आलम यह है कि जो निर्माण 49 करोड़ रुपए के प्रस्तावित बजट के साथ शुरू हुआ था जो अब करीब 100 करोड़ तक पहुंच गया है.

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