उत्तराखंडक्राइमदेश-विदेशयूथ कार्नरवीडियोशिक्षासामाजिकस्वास्थ्य

VIP के खिलाफ फिर सड़कों पर कांग्रेसी, CBI जांच की मांग, कैंडल मार्च निकाला video

Listen to this article
देहरादून, 27 दिसम्बर। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस में आक्रोश है। आज प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने देहरादून में प्रदर्शन किया और कैंडल मार्च निकाला। कैंडल मार्च में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि अंकिता की हत्या केवल एक अपराध नहीं, बल्कि भाजपा की सत्ता-संरक्षित व्यवस्था द्वारा की गई न्याय की सुनियोजित हत्या है। यह शर्मनाक है कि एक बेटी की जान जाने के बाद भी भाजपा सरकार आरोपियों को बचाने में लगी रही। उन्होंने मामले में सीबीआई जांच की मांग की।
उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम और भाजपा विधायक रेणु बिष्ट की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन आज तक इनकी निष्पक्ष जांच तक नहीं कराई गई। आखिर भाजपा किससे और क्यों डर रही है? गोदियाल ने सवाल उठाया कि जब भाजपा के अपने ही लोग ‘वीआईपी’ संरक्षण की बात सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं, तो फिर भाजपा सरकार सीबीआई जांच से क्यों भाग रही है?
सरकार शुरू  से ही साक्ष्य मिटाने में लगी रही 
गोदियाल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने शुरू से ही साक्ष्य मिटाने, आरोपियों को बचाने और पीड़ित परिवार को मानसिक रूप से तोड़ने का काम किया है। उन्होंने पार्टी की ओर से मांग की कि दुष्यंत गौतम और रेणु बिष्ट की तत्काल गिरफ्तारी हो, इस पूरे हत्याकांड की सर्वाेच्च न्यायालय के सिटिंग न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच कराई जाए और किसी भी वीआईपी, राजनीतिक दबाव या सत्ता संरक्षण को जांच से दूर रखा जाए। प्रदर्शनकारियों में पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट, विधायक भुवन कापड़ी, प्रदेश महामंत्री राजेंद्र भंडारी, महिला कांग्रेस की अध्यक्ष ज्योति रौतेला, सूर्यकांत धस्माना, लालचंद शर्मा, याकूब सिद्दकी, राजीव महर्षि, गरिमा दसौनी, सुजाता पॉल, डॉ. प्रतिमा सिंह, महानगर अध्यक्ष जसविंदर सिंह गोगी, प्रदीप जोशी, अभिनव थापर, आशा मनोरमा डोबरियाल आदि शामिल रहे।
कांग्रेस की ये हैं मांगें 
– दुष्यंत गौतम और रेणु बिष्ट की तत्काल गिरफ्तारी हो।
– इस पूरे हत्याकांड की सर्वोच्च न्यायालय के सिंटिंग न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच कराई जाए।
– किसी भी वीआईपी, राजनीतिक दबाव या सत्ता संरक्षण को जांच से दूर रखा जाए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button