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उत्तराखंड के यूनिवर्सिटी-कॉलेज में प्रवेश के लिए छात्रों की अपार आईडी जरूरी

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देहरादून, 16 जनवरी। वैसे तो यूनिवर्सिटी-कॉलेज में प्रवेश के लिए APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) आईडी अभी अनिवार्य (mandatory) नहीं है, लेकिन सरकार छात्रों को इसे बनवाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है क्योंकि यह भविष्य में पढ़ाई के रिकॉर्ड्स (डिग्री, मार्कशीट, सर्टिफिकेट) को डिजिटली स्टोर और मैनेज करने में मदद करेगी, जिससे एडमिशन और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन आसान हो जाएगा; यह एक डिजिटल पहचान पत्र की तरह काम करती है. लेकिन उत्तराखंड राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए छात्रों की अपार आईडी अनिवार्य कर दी गई है। अपार आईडी के जरिए ही समर्थ पोर्टल पर प्रवेश के लिए पंजीकरण किया जा सकेगा।

31 मार्च के बाद किसी भी ईआरपी सिस्टम का प्रयोग होगा बंद
उच्च शिक्षा विभाग में डिजिटलीकरण और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सचिव उच्च शिक्षा रंजीत कुमार सिन्हा ने सचिवालय में समर्थ पोर्टल के विभिन्न मॉड्यूल्स के क्रियान्वयन, परीक्षा सुधारों समेत कई मुद्दों को लेकर बैठक की। उन्होंने निर्देशित किया कि सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रों का अपार आईडी डाटा तत्काल अपडेट किया जाए तथा इसे समर्थ पोर्टल से जोड़ा जाय। इसके लिए उन्होंने 31 मार्च की समय-सीमा तय करते हुए कहा कि इस तिथि के बाद किसी भी अन्य ईआरपी सिस्टम का प्रयोग पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।

सभी कर्मचारियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य
सभी विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया गया कि 31 मार्च से पहले अपना सभी पुराना डाटा समर्थ पोर्टल पर ट्रांसफर कर लें। इसके अलावा, सभी विश्वविद्यालयों के लिए समर्थ के लीव मैनेजमेंट, बजट अकाउंटिंग, पेरोल मॉड्यूल अनिवार्य रूप से लागू होंगे। उच्च शिक्षा सचिव ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के कार्मिकों (शिक्षक एवं गैर-शिक्षक) का प्रोफाइल समर्थ पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य होगा। शासन के निर्देशों के अनुरूप आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करना होगा। यदि कोई कर्मचारी बायोमेट्रिक उपस्थिति नहीं देगा, तो उसका वेतन जारी नहीं किया जाएगा। केवल समर्थ पोर्टल पर दर्ज अवकाश ही मान्य होंगे।

उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों को परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिए। इसमें प्रश्नपत्र निर्माण को ऑटोमेटेड बनाना, प्रश्नपत्र बैंक तैयार करना तथा अन्य संबंधित सिस्टम को स्वचालित करने पर जोर दिया गया।

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