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इस बार हिंदू नववर्ष 12 नहीं 13 महीने का होगा, 17 मई से 15 जून तक पुरुषोत्तम मास 

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हरिद्वार, 20 जनवरी। साल 2026 इस बार बहुत की खास रहने वाला है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष अधिक ज्येष्ठ मास की शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और यह 15 जून 2026 तक रहेगा. इस वजह से कई व्रत और त्योहार लगभग 15 से 20 दिन आगे खिसक सकते हैं. अधिकमास के कारण यह हिंदू नववर्ष 13 महीनों का होगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने इस अतिरिक्त महीने को अपना नाम दिया, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है.
अधिक मास, ज्येष्ठ मास, पुरुषोत्तम मास या मलमास सब एक ही नाम
इस अधिक मास को मलमास भी कहा जाता है यह महीना सनातन धर्म में भगवान विष्णु की आराधना तथा तथा पूजा पाठ आदि के शुभ फल प्राप्ति के लिए बहुत ही पवित्र माना गया है। साल 2026 में अधिक मास ज्येष्ठ मास यानी जेठ के महीने में आएगा इसी कारण इस बार जेठ का महीना लगभग 59 दिन का रहेगा। प्रेरणा अनुसंधान संस्थान के अध्यक्ष राहुल अग्रवाल के मुताबिक धार्मिक दृष्टि से भी इस मास का बहुत ही महत्व बताया गया है।
क्या है पुरुषोत्तम मास या मलमास
पौराणिक कथा के अनुसार, जब यह अतिरिक्त महीना आया तो इसे कोई देवता अपनाना नहीं चाहता था क्योंकि इसमें कोई मांगलिक कार्य नहीं होते थे. तब भगवान विष्णु ने इसे अपनाया और अपना नाम ‘पुरुषोत्तम’ इस मास को दिया, जिससे यह पवित्र हो गया और इस दौरान किए गए कार्यों का फल कई गुना बढ़ गया. चंद्र और सौर वर्ष के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन साल में लगभग एक महीना (30 दिन) हो जाता है. इस अतिरिक्त महीने को सौर चक्र और चंद्र चक्र को बराबर करने के लिए जोड़ा जाता है. 
इस पूरे महीने भगवान श्रीकृष्ण, विष्णु की पूजा का विशेष महत्व
मान्यता के अनुसार इस मास में किया गया पुण्य कर्म कई गुना फल प्राप्ति वाला बताया गया है। इस पूरे महीने भगवान विष्णु भगवान श्री कृष्ण की पूजा आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। अपनी समर्थ के अनुसार इस महीने में वस्त्र दान, दीपदान, गंगा स्नान या किसी भी रूप में सेवा कार्य करना चाहिए। हालांकि मलमास की अवधि में शुभ कार्य करने की मनाई है। मलमास में विवाह मुंडन गृह प्रवेश या नए शुभ कार्य आरंभ नहीं करने चाहिए।
तीन साल में आता है 33 दिन का अंतर 
हिंदू पंचांग के अनुसार चंद्र वर्ष 354 दिन का होता है और सौर वर्ष 365 दिन और लगभग छह घंटे का होता है। इन दोनों के बीच हर साल लगभग 11 दोनों का अंतर आ जाता है। तीन साल में यह अंतर लगभग 33 दिन का हो जाता है। इसी अंतर का संतुलन बनाए रखने के लिए हर तीसरे साल पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास भी कहते हैं। अधिक मास का संबंध पूरी तरह सूर्य की राशि परिवर्तन से होता है हर चंद्र मास में सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, जिस कारण हर मास संक्रांति होती है। लेकिन जब किसी चंद्र मास में सूर्य अपनी राशि नहीं बदलता है और एक ही राशि में बने रहते हैं तब उसे अधिक मास माना जाता है। देश विदेश की ताजा खबरों के लिए देखते रहिये https://sarthakpahal.com/

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