भारत पर्व पर आज लाल किले में दिखेगी देवभूमि की झलक, सांस्कृतिक विविधता और विकास की कहानी

देहरादून, 26 जनवरी। उत्तराखंड देवभूमि की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और विकास यात्रा को देश के सामने प्रस्तुत करने के लिए राज्य सरकार की ओर से भव्य तैयारियां की गई हैं. देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय समारोह से लेकर राजधानी दिल्ली तक उत्तराखंड की झांकियां लोगों का ध्यान आकर्षित करेंगी. इन झांकियों के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, लोक परंपराएं, धार्मिक आस्था और विकास की दिशा को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया जाएगा.
प्रदेश के 25 सालों के गौरवशाली सफर को समेटा गया है इस झांकी में
राज्य सरकार के विजन के अनुरूप तैयार की गई झांकियों में देवभूमि उत्तराखंड के 25 सालों के गौरवशाली सफर को विशेष रूप से उकेरा गया है. इसमें यह दिखाया गया है कि किस तरह राज्य ने सीमित संसाधनों के बावजूद पर्यटन, संस्कृति, बुनियादी ढांचे और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. झांकी के जरिए उत्तराखंड की विकास यात्रा को एक सशक्त संदेश के रूप में प्रस्तुत किया गया है.
देहरादून के परेड ग्राउंड में राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लिए तैयार झाकियां जहां प्रदेश वासियों का ध्यान आकर्षित करेगी, बल्कि दिल्ली में आयोजित भारत पर्व के लिए भी सूचना विभाग विशेष रूप से झांकी को तैयार किया है. देहरादून में सूचना विभाग की ‘रजत जयंती एवं शीतकालीन धार्मिक यात्रा व पर्यटन’ विषय पर झांकी का प्रदर्शन किया जाएगा.
भारत पर्व में आज नजर आएगी उत्तराखंड की खास झांकी
भारत पर्व के दौरान 26 से 31 जनवरी तक नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में उत्तराखंड की झांकी प्रदर्शित की जाएगी. इस दौरान देश-विदेश से आने वाले पर्यटक और दर्शक उत्तराखंड की सांस्कृतिक विविधता और विकास की कहानी को नजदीक से देख सकेंगे.
भारत पर्व में प्रस्तुत की जा रही झांकी का मुख्य विषय ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ रखा गया है. इसमें राज्य की सांस्कृतिक, आर्थिक और पारंपरिक आत्मनिर्भरता को प्रमुखता से दर्शाया गया है. झांकी का ट्रेलर सेक्शन विशेष रूप से आकर्षक बनाया गया है, जहां उत्तराखंड के पारंपरिक वाद्य यंत्र ढोल और रणसिंघा की तांबे से बनी भव्य प्रतिकृतियां लगाई गई हैं.
ये प्रतिकृतियां प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति और शिल्प परंपरा की पहचान हैं. इसके अलावा ट्रेलर सेक्शन में तांबे के मंजीरे की एक विशाल आकृति भी स्थापित की गई है, जो उत्तराखंड की प्रसिद्ध ताम्र कला और शिल्पकारों की उत्कृष्ट कारीगरी को दर्शाती है. यह झांकी न केवल सांस्कृतिक धरोहर को सामने लाती है, बल्कि पारंपरिक हस्तशिल्प को संरक्षण और प्रोत्साहन का संदेश भी देती है.
उधर, देहरादून परेड ग्राउंड की झांकी में उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों, धार्मिक आस्थाओं, चारधाम यात्रा, प्राकृतिक सौंदर्य और सतत विकास की झलक भी देखने को मिलेगी. इसके माध्यम से यह दर्शाया गया है कि उत्तराखंड पर्यटन, अध्यात्म और पर्यावरण संतुलन के साथ आगे बढ़ रहा है.
झांकी के माध्यम से राज्य की परंपराओं, पर्यटन और विकास के सफर को देशवासियों के सामने रखा जा रहा है. दिल्ली से लेकर देहरादून तक लोग उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और आत्मनिर्भरता की झलक देख सकेंगे. भारत पर्व में यह झांकी निश्चित रूप से लोगों के आकर्षण का केंद्र बनेगी और उत्तराखंड की पहचान को राष्ट्रीय मंच पर और मजबूत करेगी.
– बंशीधर तिवारी, सूचना महानिदेशक, सूचना विभाग



