‘उत्तराखंड राज्य गीत’ को ठंडे बस्ते में डालना उत्तराखंड का अपमान : हरीश रावत

देहरादून, 6 फरवरी। कांग्रेस ने उत्तराखंड के राज्य गीत (Uttarakhand Rajya Geet) की वर्षगांठ कार्यक्रम का आयोजन किया. जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में खुद नरेंद्र सिंह नेगी शामिल हुए. कार्यक्रम में नरेंद्र सिंह नेगी ने राज्य गीत की कुछ पंक्तियां गायी. उसके बाद पूरे गीत को स्क्रीन में दिखाया गया.
इस राज्य गीत ‘उत्तराखंड देवभूमि–मातृभूमि, शत-शत वंदन, अभिनंदन…’ को लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी और अनुराधा निराला ने गाया है. इस गीत के संगीत निर्देशक खुद नरेंद्र सिंह नेगी हैं. खास बात ये है कि नरेंद्र सिंह नेगी ने इस गीत के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लिया था.
यह गीत मैंने राज्य के लिए बनाया था. इसके लिए सरकार से कोई पारिश्रमिक नहीं लिया. क्योंकि, यह मेरी मातृभूमि के प्रति सेवा थी, लेकिन जिस प्रकार इस गीत को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. वो अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है. मैं व्यक्तिगत रूप से राज्य-गीत की उपेक्षा से बहुत आहत हूं.
नरेंद्र सिंह नेगी, लोक गायक
हरीश रावत ने बोले- राज्य गीत भुलाना स्वीकार्य नहीं: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि राज्य गठन के 15 साल बाद उत्तराखंड को उसकी पहचान देने वाला राज्य गीत मिला था. यह किसी एक सरकार का नहीं, बल्कि पूरे राज्य की धरोहर है, लेकिन संकीर्ण राजनीतिक सोच और श्रेय लेने की होड़ में बीजेपी सरकार ने इसे भुला दिया, जो उत्तराखंड की भावना के साथ अन्याय है.
उन्होंने कहा कि इस गीत को शुरू से लेकर बनाने और चयन करने वाले सब हमारे समाज के प्रतिष्ठित लोग हैं. जिनको उत्तराखंड की पहचान कहा जाता है, लेकिन इस राज्य गीत को सरकार बदलने पर पृष्ठभूमि में डाल दिया जाए, जो स्वीकार्य नहीं है. इसलिए आज इस गीत की वर्षगांठ पर यह निर्णय लिया गया कि हम इस गीत का सामूहिक रूप से गायन करें.
इसके बाद हर साल विधिवत रूप से 6 फरवरी को इसी तरह इस गीत का सामूहिक रूप से गायन करेंगे. हरीश रावत का कहना है कि भले ही राज्य सरकार इस गीत को भुलाने की कोशिश करें, लेकिन हमारा प्रयास रहेगा कि लोग इसको कभी भूले नहीं. सरकार चलाने वाले लोगों को यह नहीं लगा कि इस गीत का श्रेय कांग्रेस को मिले.
सरकारी उपेक्षा का शिकार हुआ ‘उत्तराखंड देवभूमि–मातृभूमि’ गीत
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक अस्मिता, लोक चेतना और देवभूमि की आत्मा को स्वर देने वाला राज्य का आधिकारिक गीत ‘उत्तराखंड देवभूमि–मातृभूमि’ आज सरकारी उपेक्षा का शिकार बना हुआ है. वहीं, कार्यक्रम में पूर्व सीएम हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, गरिमा दसौनी आदि मौजूद रहे.
उत्तराखंड की सांस्कृतिक अस्मिता, लोक चेतना और देवभूमि की आत्मा को स्वर देने वाला राज्य का आधिकारिक गीत ‘उत्तराखंड देवभूमि–मातृभूमि’ आज सरकारी उपेक्षा का शिकार बना हुआ है. यह वही राज्य गीत है, जिसे 6 फरवरी 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य की जनता को समर्पित किया था.
अभिनव थापर, कार्यक्रम आयोजक



