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अंकिता हत्याकांड को लेकर देहरादून महापंचायत में VIP के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज

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देहरादून, 8 फरवरी। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय के लिए फिर से आवाज बुंलद हो गई है। बता दें कि साल 2022 में अंकिता भंडारी की भाजपा नेता के बेटे पुलकित आर्य ने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर हत्या कर दी थी। उन्होंने एक वीआईपी को स्पेशल सर्विस देने का दबाव अंकिता भंडारी पर डाला था। इनकार करने पर तीनों ने अंकिता भंडारी की हत्या कर उसका शव चीला नहर में ठिकाने लगा दिया था। हालांकि इस मामले में कोर्ट पुलकित सहित उसके दो साथियों को उम्रकैद की सजा सुना चुकी है। बीते दिनों अभिनेत्री उर्मिला सनावर के सोशल मीडिया में किए गए दावों से राज्य में सियासी भूचाल आ गया था। वीआईपी के नाम के खुलासे को लेकर पूरे राज्य में आंदोलन शुरू हो गए थे। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मामले की जांच की सीबीआई से कराने की संस्तुति कर दी थी। बकायदा सीबीआई ने मामले की जांच भी शुरू कर दी है। लेकिन फिर भी लोगों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है। इसे लेकर आज देहरादून के परेड ग्राउंड में महापंचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत में अंकिता के माता-पिता, पूर्व सीएम हरीश रावत, सपा के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सत्यनारायण सचान सहित तमाम संगठनों ने भाग लिया। महापंचायत में भारी भीड़ रही।
परिजनों की तहरीर की हो सीबीआई जांच
अंकिता भंडारी हत्याकांड न्याय यात्रा के तहत आज परेड ग्राउंड में हुई महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि जब तक वीआईपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो जाती तब तक आंदोलन चलता रहेगा। वक्ताओं ने कहा कि सीएम पुष्कर धामी अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच पर्यावरणविद की एफआईआर को आधार बनाकर करवा रहे हैं। कहा कि सीबीआई जांच उस व्यक्ति की तहरीर पर नहीं बल्कि अंकिता के माता-पिता की तहरीर के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए। उन्होंने कहा जिन लोगों ने साक्ष्य मिटाये, उनको भी सीबीआई जांच के दायरे में लाया जाए। कहा कि जिन्होंने वसंत विहार थाने में अंकिता केस मे तहरीर दी है, उनका कोई संबंध अंकिता के परिवार से नहीं है। न वह किसी आंदोलन में नजर आए। लिहाजा उनकी भी जांच होनी चाहिए।
सरकार ने तीन साल क्यों लटकाई जांच
महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि अंकिता हत्याकांड में सजायाफ्ता लोगों के केस के तहत अग्रिम जांच होनी चाहिए। भाकपा माले के सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण में सरकार ने सड़कों के आंदोलनों के दबाव में सीबीआई जांच कराये जाने की घोषणा की। यह भी प्रश्न है कि अंकिता के माता-पिता और तमाम आंदोलनकारी पहले दिन से ही इस मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाते आ रहे थे, लेकिन सरकार हीलाहवाली करती रही। उन्होंने कहा अब 3 साल बाद विलंबित जांच हो रही है। कहा कि अंकिता हत्याकांड की जांच सीबीआई से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए।

लोगों में एक भ्रम फैलाया गया था कि अंकिता के माता-पिता सीएम से मिले थे और बिक गए, लेकिन हम किसी भी दशा में झुकेंगे नहीं, वर्ना उस बच्ची की आत्मा क्या बोलेगी, जो उनके आगे नहीं झुकी। फिर, हम कैसे झुक सकते हैं। हमने सीएम से मिलकर सीबीआई जांच की मांग सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में करने को पत्र दिया था। अनिल जोशी नाम के व्यक्ति को हम जानते तक नहीं। रेनू बिष्ट की जांच हो, जिसने रिजॉर्ट तुड़वाया। गट्टू-भट्टू की कॉल डिटेल निकाली जाए।
– वीरेंद्र भंडारी, अंकिता के पिता

ये न्याय की लड़ाई है। जन संगठन जैसे आंदोलनों में कैटलिस्ट का काम करते हैं। हमें मातृशक्ति के नेतृत्व साथ चलने और पीछे चलने में कहीं कोई संकोच नहीं है। राजनीति हर जगह होती है। इस आंदोलन में भी राजनीति को नकार नहीं सकते, लेकिन राजनीति से बड़ी जनभावना होती है। बेटी के साथ जिसने भी यह दुस्साहस किया, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसे बचाने के लिए दुनिया की सारी ताकत क्यों न लगी हो, वह व्यक्ति कानून के हवाले करके दंडित किया जाना चाहिए। अंकिता हमारे समाज की अस्मिता का प्रतीक है। अंकिता का दर्जा तीलू रौतेली और गौरा देवी से कम नहीं है।
– हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री

अंकिता की हत्या अंतरराष्ट्रीय स्तर के एपस्टीन फाइल्स का उत्तराखंड संस्करण जैसी है। अनिल जोशी खुद को पर्यावरणविद् कहते हैं, लेकिन पर्यावरण के क्षेत्र में उनका कोई योगदान नहीं है। जब जोशीमठ धंस रहा था, तब वे सरकार के एजेंट बनकर वहां गए थे और लोगों ने उन्हें खदेड़ दिया था। अब वे अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच को प्रभावित करने के लिए कूद पड़े हैं।
– इंद्रेश मैखुरी, भाकपा (माले) नेता

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