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चेक बाउंस मामले में कॉमेडियन राजपाल यादव अभी तिहाड़ जेल में ही काटेंगे 4 और रातें

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नई दिल्ली, 12 फरवरी। बॉलीवुड के कॉमेडियन एक्टर राजपाल के चेक बाउंस के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आज, 12 फरवरी को सुनवाई की. कोर्ट ने जेल में बंद राजपाल यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले के शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया है. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 16 फरवरी को करने का आदेश दिया.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजपाल यादव के व्यवहार पर आपत्ति जताई और कहा कि हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई थी, लेकिन कोई राहत नहीं मिली. इसके पहले 5 फरवरी को हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को कोई भी राहत देने से इनकार करते हुए तुरंत सरेंडर करने को कहा था जिसके बाद राजपाल यादव ने जेल में सरेंडर कर दिया था. बता दें कि राजपाल यादव को कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेक बाउंस के एक मामले में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी. हालांकि जून 2024 में हाईकोर्ट ने सजा को निलंबित कर दिया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि राजपाल यादव आदतन अपराधी नहीं हैं इसलिए उनकी सजा निलंबित की जाती है.

दरअसल कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेक बाउंस केस में दोषी करार देने के बाद राजपाल यादव पर 1 करोड़ 60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था. कड़कड़डूमा कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की पत्नी राधा पर भी 10 लाख रुपये प्रति केस जुर्माना लगाया था. दोनों को चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में यह सजा सुनाई गई थी. शिकायतकर्ता मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड ने कोर्ट को बताया था कि राजपाल ने अप्रैल 2010 में फिल्म ‘अता पता लापता’ पूरी करने के लिए कंपनी से मदद मांगी थी. 30 मई 2010 में दोनों के बीच करार हुआ और उन्होंने राजपाल यादव की कंपनी को 5 करोड़ का लोन दे दिया.

करार के मुताबिक राजपाल को ब्याज सहित आठ करोड़ रुपये लौटाने थे. लेकिन वह पहली बार ये रकम नहीं लौटा सके. उसके बाद दोनों के बीच तीन बार करार का रिनिवल हुआ. 9 अगस्त 2012 को वह अंतिम करार में आरोपी राजपाल यादव ने शिकायतकर्ता को 11 करोड़ 10 लाख 60 हजार 350 रुपये लौटाने की सहमति भी थी. राजपाल यादव की कंपनी यह भी पैसा देने में नाकाम रही.

अपने बचाव में राजपाल यादव ने कोर्ट को बताया था कि उन्होंने मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड से कोई उधार नहीं लिया था. राजपाल यादव के मुताबिक मुरली प्रोजेक्ट की कंपनी में पैसा निवेश किया था. लेकिन कड़कड़डूमा कोर्ट ने उनकी दलील को अस्वीकार करते हुए उन्हें चेक बाउंस का दोषी पाया था.

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