
देवप्रयाग, 22 फरवरी। हौसले बुलंद हो तो पर्वत भी राई बन जाते हैं, इस कहावत को चरितार्थ किया है केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय देवप्रयाग के छात्र ओम योगी विशाल भारद्वाज ने. अपनी असाधारण इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए ओम ने पद्म शीर्षासन में अपना ही पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर चौथा विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है.
घंटे 44 मिनट 54 सेकंड तक किया पद्म शीर्षासन

उत्तर प्रदेश के बागपत में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय रघुनाथ कीर्ति परिसर देवप्रयाग के बीएससी (योग) तृतीय वर्ष के छात्र ओम योगी विशाल भारद्वाज ने 3 घंटे 44 मिनट 54 सेकंड तक लगातार स्थिर रहकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की. इससे पहले उनका रिकॉर्ड 2 घंटे 9 मिनट का था.
गर्दन में चोट के बावजूद भी किया आसन
ओम योगी अब तक 3 बार इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड और एक बार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं. उनकी यह सफलता इसलिए भी खास है. क्योंकि, अभ्यास के दौरान गर्दन में गंभीर चोट लगने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें यह आसन न करने की सलाह दी थी, लेकिन दृढ़ निश्चय के बल पर उन्होंने अस्पताल से निकलकर सीधे रिकॉर्ड बुक में अपनी जगह बनाई.
मां का संघर्ष बना प्रेरणा का आधार
ओम की इस स्वर्णिम सफलता के पीछे उनकी माता उमा देवी का अटूट संघर्ष छिपा है. पिता के निधन के बाद एक साधारण नौकरी कर उन्होंने अपने बेटे को इस मुकाम तक पहुंचाया. आज ओम के पास 110 मेडल, 90 ट्रॉफियां और ‘राष्ट्रीय गौरव एवं उत्कृष्टता पुरस्कार 2026’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मान हैं.
योग से जोड़ चुके 50 हजार से ज्यादा लोग
वे अब तक 50 हजार से ज्यादा लोगों को योग से जोड़ चुके हैं. वहीं, एक साल से वो देवप्रयाग में स्तिथ पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को हफ्ते में दो दिन योगाभ्यास भी सीखा रहे हैं. उनकी इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय परिसर और पूरे देवप्रयाग क्षेत्र में हर्ष की लहर है.



