
देहरादून, 7 मार्च। प्रेम, सद्भाव और आस्था का प्रतीक देहरादून का ऐतिहासिक झंडा मेला श्री गुरु राम राय दरबार साहिब में 94 फीट ऊंचे झंडेजी के आरोहण के साथ शनिवार से शुरू हो जाएगा। पुराने झंडेजी को उतारने के बाद पूजा और गिलाफ चढ़ाने की दिनभर चलने वाली प्रक्रिया के बाद दोपहर दो से शाम चार बजे के बीच दरबार साहिब के सज्जादानशीन श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज की अगुआई में झंडेजी का आरोहण होगा। इस वर्ष देहरादून के व्यापारी अनिल कुमार गोयल के परिवार को दर्शनी गिलाफ चढ़ाने का सौभाग्य मिलेगा। श्री झंडे जी मेला उत्तर भारत के सबसे बड़े और ऐतिहासिक मेलों में से एक है। यह न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि देहरादून शहर की उत्पत्ति और पहचान से भी गहरा जुड़ा हुआ है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से हजारों श्रद्धालु पैदल या वाहनों से यहां पहुंचते हैं।
इस पल का साक्षी बनने के लिए शनिवार देर शाम तक पहुंची देश-विदेश की संगत से दरबार साहिब परिसर पैक हो गया है। ढोल नगाड़े की थाप पर लोग गुरु महाराज की भक्ति में झूमते रहे। होली के पांचवें दिन चैत्र मास के कृष्ण पंचमी को दरबार साहिब में झंडेजी के आरोहण के साथ मेला शुरू हो जाता है। इस बार 27 मार्च रामनवमी तक मेला चलेगा।
बीते 25 फरवरी से धार्मिक आयोजन शुरू हो चुके हैं वहीं 28 फरवरी से उत्तराखंड के अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश से संगत के पहुंचने का सिलसिला जारी है। दरबार साहिब में आने वाली संगतों और श्रद्धालुओं की मन्नतें पूरी होती हैं। वर्ष भर देश-विदेश से श्रद्धालु इस पावन अवसर की प्रतीक्षा करते हैं। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में संगतें और श्रद्धालु देहरादून पहुंच चुके हैं।
दरबार साहिब परिसर में शनिवार को भी देर रात तक गुरु महाराज के जयकारे गूंजते रहे। गुरु महिमा के रंग में रंगी संगतें श्रद्धा व भक्ति भाव में डूबी रहीं। संगतों ने श्री गुरु राम राय जी महाराज के शबद का सिमरन किया व गुरु महिमा के महत्व को जाना। संगत ने ढोल की थाप पर गुरु महाराज जी के भजन गाए व जमकर नृत्य भी किया। यह मेला सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है, जहां हर वर्ग के लोग अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं। मेले के दौरान दरबार साहिब में विशाल लंगर का आयोजन होता है, जहां बिना भेदभाव के सभी को भोजन कराया जाता है।
पूर्व की संगत को पगड़ी, ताबीज व प्रसाद देकर दी विदाई
परंपरा के अनुसार, झंडेजी के आरोहण की पूर्व संध्या पर पूर्व की संगत को पगड़ी, ताबीज व प्रसाद देकर विदाई दी गई। श्री झंडा जी मेले के मेला अधिकारी विजय गुलाटी ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और मेले की धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बताया कि झंडा मेला के लिए दरबार साहिब परिसर में 200 से अधिक दुकानें सज गई हैं। दरबार साहिब परिसर में पांच एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं। एलईडी स्क्रीन, फेसबुक एवं यूट्यूब पर मेले का सजीव प्रसारण किया जाएगा।
अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करने वाले हैं गुरु: श्रीमहंत
दरबार साहिब के सज्जादानशीन श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज ने पूर्व संध्या पर संगतों को गुरुमंत्र दिया। उन्होंने गुरु महिमा का महत्व बताते हुए कहा कि जिस प्रकार सूर्य की किरणें सभी को समान रूप से प्रकाश और ऊष्मा देती हैं, उसी प्रकार आध्यात्मिक गुरु भी अपनी कृपा और करुणा सभी पर समान रूप से बरसाते हैं। गुरु वह हैं, जो हमारे अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं।
यह रहेगा कार्यक्रम
सुबह सात बजे विशेष पूजा के बाद झंडेजी को उतारने की प्रक्रिया शुरू होगी। दूध, दही, गंगाजल से नये ध्वजदंड (झंडेजी) को स्नान कराया जाएगा।
सुबह 10 बजे से सादे गिलाफ चढ़ाने का कार्यक्रम शुरू होगा।
दोपहर एक बजे सनील के गिलाफ चढ़ाए जाएंगे। दरबार साहिब के सज्जादानशीन श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज संगत को आशीर्वाद देंगे, इसके बाद दर्शनी गिलाफ चढ़ाया जाएगा।
शाम चार से पांच बजे श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज झंडेजी के आरोहण कराएंगे।
शाम को संगत गुरु महाराज का आशीर्वाद लेकर विदा होंगी।
दरबार साहिब परिसर से रविवार से होगी नगर परिक्रमा
मेला अधिकारी विजय गुलाटी ने बताया झंडेजी के आरोहण के तीसरे दिन यानी मंगलवार को दरबार साहिब के सज्जादानशीन देवेंद्र दास महाराज की अगुआई में दरबार साहिब परिसर से सुबह साढ़े सात बजे से नगर प्ररिक्रमा शुरू होगी। विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए 12 बजे दरबार साहिब में वापस होगी।
झंडेजी पर तीन तरह के चढ़ते हैं गिलाफ
झंडेजी में तीन तरह के गिलाफ का आवरण होता है। सबसे भीतर 41 सादे गिलाफ, मध्य भाग में 21 सनील के गिलाफ, जबकि सबसे बाहरी भाग में एक दर्शनी गिलाफ चढ़ाया जाता है। दर्शनी व सनील गिलाफ चढ़ाने के लिए बुकिंग की भीड़ रहती है। इस बार बीते पांच मार्च से दरबार साहिब में गिलाफ चढ़ाने का सिलसिला शुरू होगा।
लोक कल्याण के लिए स्थापित किया था विशाल ध्वज
सिखों के सातवें गुरु हर राय के बड़े पुत्र श्री गुरु राम राय महाराज का जन्म सन् 1646 ई.में पंजाब के जिला होशियारपुर स्थित कीरतपुर में हुआ था। बाद में उन्होंने देहरादून को अपनी तपस्थली बनाया। यहां दरबार साहिब में लोक-कल्याण के संदेश के साथ एक विशाल ध्वजदंड स्थापित कर श्रद्धालुओं को ध्वज के माध्यम से आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रेरणा दी।
फुटकर एवं थोक विक्रेता हैं अनिल कुमार गोयल
पार्क रोड निवासी व्यापारी अनिल कुमार गोयल का परिवार इस बार दर्शनी गिलाफ चढ़ाएगा। पीपलमंडी में मै. पीतांबर दास एंड संस के नाम से अनिल कुमार गोयल फुटकर एवं थोक विक्रेता हैं। यहां उनकी 75 वर्ष पुरानी दुकान है। उन्होंने बताया कि पूर्व में परिवार की खुशी और समृद्धि के लिए दर्शनी गिलाफ की बुकिंग की थी।



