
ऋषिकेश, 15 मार्च। परमार्थ निकेतन स्वर्गाश्रम में आयोजित सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के अंतिम दिन गंगा तट पर 80 देशों के 1500 योग साधकों ने एक साथ योग साधना की। विभिन्न देशों से आए साधकों ने न सिर्फ योग को जीवन का अभिन्न अंग के रूप में आत्मसात करने का संकल्प लिया, बल्कि वैश्विक अस्थिरता के बीच योग के माध्यम से विश्व को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की प्रेरणा का संदेश दिया। रविवार सुबह सर्वप्रथम सामूहिक योग साधना हुई और समापन परमार्थ गंगा आरती व संगीत एवं नृत्य के उल्लास के साथ हुआ।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती व साध्वी डा. भगवती सरस्वती की उपस्थिति में विभिन्न देशों से आए योग साधकों, राजनयिक व उच्चायुक्तों ने सामूहिक रूप से विश्व शांति के लिए प्रार्थना की और महायज्ञ में आहुतियां डाली। संस्था अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि एक चेतना है।
वह चेतना जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ व ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’ का संदेश देती है। यहां योग मन, आत्मा और सम्पूर्ण मानवता को जोड़ने का सेतु है। मां गंगा के पावन तट पर जब विभिन्न देश, भाषा और संस्कृतियों के साधक एक साथ बैठकर ध्यान, प्रार्थना और साधना करते हैं, तब यह स्पष्ट हो जाता है कि योग सीमाओं से परे है। आज जब विश्व युद्ध, संघर्ष और विभाजन के दौर से गुजर रहा है, तब यह महोत्सव शांति का, करुणा का और प्रेम का एक शक्तिशाली संदेश देता है। यहां आये साधक देशों के प्रतिनिधि बनकर नहीं, बल्कि मानवता के साधक बनकर आए हैं। डा. साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि प्रेम हमारे जीवन के अनुभव को हमारे शरीर, मन और हमारे संबंधों को बदल देता है।
हजारों वर्ष पहले हमारे ऋषियों और योगियों ने उस सत्य को समझ लिया था, जिसे आज आधुनिक न्यूरोसाइंस भी स्वीकार कर रहा है कि प्रेम हमारे लिए अत्यंत लाभकारी है। यह हमारे मस्तिष्क की रसायन प्रक्रिया को संतुलित करता है, हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है और हमारी बुद्धि तथा समग्र स्वास्थ्य को बेहतर करता है।
इस अवसर पर इक्वाडोर के राजदूत एचई फर्नांडो जेवियर बुचेली वर्गास, गुयाना के उच्चायुक्त एचई धरमकुमार सीराज, बेलारूस के राजदूत एचई मिखाइल कास्को, मंगोलिया के राजदूत एचई गणबोल्ड दंबाजाव, योगाचार्य स्टुअर्ट गिलक्रिस्ट, दासा दास, स्टाइन व कई अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
प्रेम का वास्तविक अर्थ समझाया
आध्यात्मिक सत्र ‘प्रेम योग’ का विषय ‘द योग आफ लव’, ‘ओपनिंग द हार्ट एज अ पाथ आफ अवेकनिंग’ आदि रखे गए। साध्वी डा. भगवती सरस्वती ने कहा कि सच्चा प्रेम वह है जब हमारा हृदय खुलकर उस सत्य को स्वीकार करता है कि हम वास्तव में कौन हैं।
ब्राजील से आए प्रेम बाबा ने कहा कि सनातन धर्म की परंपरा में योग उस विशाल, अनंत ज्ञान रूपी पुष्प की एक पंखुड़ी है, जो हमें हमारे सच्चे घर की ओर लौटने का मार्ग दिखाती है। कहा कि भगवद्गीता में एक सुंदर उदाहरण अर्जुन के माध्यम से मिलता है। जब वे भ्रम और द्वंद्व में पड़ जाते हैं और यह नहीं समझ पाते कि क्या सही है और क्या गलत, तब वह भगवान कृष्ण से मार्गदर्शन मांगते हैं।
उस दिव्य मार्गदर्शन के माध्यम से अर्जुन अपने भीतर के संघर्ष का सामना करते हैं, अपने अंधकार को पहचानते हैं और अंततः अपने वास्तविक उद्देश्य को पुनः खोज लेते हैं।
शास्त्रीय गायक सुधांशु शर्मा ने सूर्योदय मंत्रोच्चार, सियाना शेरमैन द्वारा मुद्रा, मंत्र, तंत्र और श्वास की उपचारात्मक शक्ति, स्टुअर्ट गिलक्रिस्ट द्वारा योगासन एवं सत्संग, दुर्गेश अमोली द्वारा योग थेरेपी, डा. आनंद बालयोगी भावनानी द्वारा अष्टांग योग साधना, डा. क्रिस्टोफर चैपल द्वारा एलिमेंटल मेडिटेशन, डा. राधिका नागरथ द्वारा प्राणायाम, मुद्रा और विश्राम, जबकि स्टाइन डुलोंग और साथियों द्वारा मंत्र ध्यान और कीर्तन की सुंदर प्रस्तुति दी गई। अन्य आध्यात्मिक गुरुओं ने भी कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार रखे।



