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ABVP के छात्रों ने गढ़वाल विवि के कुलसचिव और अफसरों को बंधक बनाकर जड़ दिया ताला

श्रीनगर गढ़वाल, 16 मार्च। श्रीनगर कैंपस में सोमवार 16 मार्च को भारी हंगामा हुआ। गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में सोमवार को छात्रहितों से जुड़ी मांगों को लेकर छात्रों ने भारीर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित छात्रों ने कुलसचिव समेत कई अधिकारियों को कार्यालय के अंदर बंद कर दिया, जिससे विश्वविद्यालय परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन रही। इस दौरान छात्रों की अधिकारियों संग तीखी बहस भी हुई। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। छात्रों का कहना था कि वे इन प्रमुख मांगों को लेकर काफी समय से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन इस पर ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
आक्रोशित छात्रों ने अधिकारियों को घेरा
जानकारी के अनुसार एबीवीपी से जुड़े छात्र मांगों को लेकर प्रशासनिक भवन पहुंचे और कुलसचिव कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों ने पीएचडी प्रवेश परीक्षा में नेट की अनिवार्यता समाप्त करने सहित कई मांगें उठाईं। मौके पर विश्वविद्यालय के मुख्य नियंता प्रो. दीपक कुमार समेत अन्य अधिकारी भी पहुंचे। कुलसचिव अनीस उज जमान ने छात्रों को बताया कि इस विषय में निर्णय उनके स्तर का नहीं है। इससे नाराज छात्रों ने कुलसचिव अनीस उज जमान, मुख्य नियंता प्रो. दीपक कुमार, संकायाध्यक्ष नियुक्ति एवं पदोन्नति प्रकोष्ठ प्रो. एमएस पंवार सहित अन्य अधिकारियों को कार्यालय में ही अपने साथ बंद कर लिया और अंदर से ताला जड़ दिया। इस दौरान विश्वविद्यालय के सुरक्षा कर्मियों और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। कुछ छात्र कार्यालय के बाहर भी डटे रहे।
मुख्य मांगों में Phd प्रवेश परीक्षा और बायोमैट्रिक हाजिरी
छात्रों की प्रमुख मांगों में पीएचडी प्रवेश में नेट की अनिवार्यता समाप्त कर विश्वविद्यालय स्तर पर पीएचडी प्रवेश परीक्षा आयोजित करना, एमएससी कंप्यूटर साइंस पाठ्यक्रम को पुनः संचालित करना तथा एनसीसी और एनएसएस के छात्रों को मिलने वाले दो क्रेडिट को परिणाम में शामिल करना शामिल है। इसके साथ ही शिक्षकों और छात्रों के लिए बायोमीट्रिक उपस्थिति अनिवार्य करने की मांग भी उठाई गई। एबीवीपी प्रदेश सहमंत्री गौरव मोहन नेगी ने कहा कि पीएचडी का सत्र पहले ही एक वर्ष पीछे चल रहा है, इसलिए इस बार पीएचडी प्रवेश परीक्षा में स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष के छात्रों को भी शामिल किया जाना चाहिए। वहीं छात्रसंघ अध्यक्ष महिपाल बिष्ट ने कहा कि इन मांगों को लेकर लंबे समय से प्रशासन से अनुरोध किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
छात्रों की प्रमुख मांगों में पीएचडी प्रवेश में नेट की अनिवार्यता समाप्त कर विश्वविद्यालय स्तर पर पीएचडी प्रवेश परीक्षा आयोजित करना, एमएससी कंप्यूटर साइंस पाठ्यक्रम को पुनः संचालित करना तथा एनसीसी और एनएसएस के छात्रों को मिलने वाले दो क्रेडिट को परिणाम में शामिल करना शामिल है। इसके साथ ही शिक्षकों और छात्रों के लिए बायोमीट्रिक उपस्थिति अनिवार्य करने की मांग भी उठाई गई। एबीवीपी प्रदेश सहमंत्री गौरव मोहन नेगी ने कहा कि पीएचडी का सत्र पहले ही एक वर्ष पीछे चल रहा है, इसलिए इस बार पीएचडी प्रवेश परीक्षा में स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष के छात्रों को भी शामिल किया जाना चाहिए। वहीं छात्रसंघ अध्यक्ष महिपाल बिष्ट ने कहा कि इन मांगों को लेकर लंबे समय से प्रशासन से अनुरोध किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
छात्र नेता अमन पंत ने कहा कि विश्वविद्यालय में नेट या जेआरएफ उत्तीर्ण छात्र पीएचडी में कम ही प्रवेश लेते हैं, इसलिए विश्वविद्यालय को अपनी अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित करनी चाहिए ताकि स्थानीय छात्रों को शोध में अवसर मिल सके। समाचार लिखे जाने तक छात्र कुलसचिव कार्यालय के अंदर अधिकारियों के साथ डटे रहे, जबकि कार्यालय के बाहर पुलिस बल और विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मी तैनात रहे।



