
ऋषिकेश, 16 मार्च। यह क्षण उनके लिए भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ऊर्जा और सनातन मूल्यों से जुड़ने का पावन और आत्मिक क्षण है। यह एक ऐसी आध्यात्मिक भूमि है जहां आकर मन को शांति, संतोष और जीवन को एक नई सकारात्मक दिशा प्राप्त होती है। उन्होंने अपनी इस यात्रा को अत्यंत शांतिपूर्ण और ऊर्जा से भरपूर बताया। भूमि ने मां गंगा का पूजन और दीपदान भी किया।
परमार्थ निकेतन हमेशा से भारतीय संस्कृति, योग, ध्यान, सेवा और आध्यात्मिकता का एक प्रमुख केंद्र रहा है। यहां आने वाला प्रत्येक साधक, अतिथि और श्रद्धालु गंगा की निर्मल धारा, हिमालय की पावन ऊर्जा और संतों के सान्निध्य में अद्भुत शांति और आत्मिक आनंद का अनुभव करते हैं।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि जब लोग विश्व शांति, संतुलन और सकारात्मकता की खोज में है, तब भारत की सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराएं मानवता को नई दिशा देने की क्षमता रखती हैं। साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि भारतीय जीवन मूल्य, करुणा, सेवा और आत्मिक जागरण के केंद्र हैं।
उन्होंने कहा कि जब समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े साधक विशेषकर कला और फिल्म जगत के प्रेरणादायी व्यक्तित्व, आध्यात्मिकता से जुड़ते हैं, तो उसका सकारात्मक प्रभाव समाज और युवाओं तक व्यापक रूप से पहुंचता है। भूमि ने सोशल मीडिया पर भी अपनी इस यात्रा की तस्वीरें साझा की हैं। उन्होंे ऋषिकेश की सादगी और यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा की प्रशंसा की।



