
देहरादून, 23 मार्च। केदारनाथ धाम में रामबाड़ा से गरुड़चट्टी तक मार्ग तैयार हो गया है। अब इस मार्ग पर पेयजल, बिजली की सुविधा जुटाई जानी है, इसके बाद मार्ग खुल सकेगा। 2013 की भीषण आपदा के बाद ध्वस्त हुए रामबाड़ा से गरुड़चट्टी मार्ग को अब तीर्थयात्रियों के पूरी तरह तैयार कर लिया गया है।
2013 की आपदा में ध्वस्त हो गया था मार्ग
केदारनाथ धाम पहुंचने के लिए गौरीकुंड से लोग यात्रा प्रारंभ करते हैं और लिंचोली होते हुए धाम तक पहुंचते हैं। वहीं, 2013 तक रामबाड़ा से गरुड़चट्टी होते हुए धाम तक पहुंचते थे। वर्ष-2013 में आई आपदा में इस मार्ग को नुकसान पहुंचा था। लोक निर्माण विभाग ने इस पुराने मार्ग को सुधारने की कोशिश शुरू की थी, जिससे एक और मार्ग का भी विकल्प भी रहे। करीब दो साल से प्रयास चल रहा था। लोनिवि ने रामबाड़ा से गरुड़चट्टी तक सवा पांच किमी लंबे मार्ग को पुन: तैयार कर लिया है। 2013 की आपदा से पहले रामबाड़ा से गरुड़चट्टी होकर ही मुख्य मार्ग केदारनाथ जाता था।
लोनिवि के अधिशासी अभियंता रायविंद ने बताया कि रामबाड़ा से गरुड़चट्टी तक मार्ग निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके आगे का मार्ग पहले से ही ठीक है। जिस मार्ग से यात्रा होती है, वह मार्ग भी ठीक कर लिया गया है। जहां पर मार्ग पिछले साल भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त हो गए थे, उनकी मरम्मत कर ली गई है।
मुश्किल समय में हो सकेगा उपयोग
जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा ने बताया कि रामबाड़ा से गरुड़चट्टी मार्ग पर बिजली, पेयजल, शौचालय जैसी सुविधाओं के लिए प्रस्ताव गया हुआ है। इन सुविधाओं के जुटने के बाद मार्ग खोला जा सकेगा। इसके अलावा कोई आपात स्थिति में मार्ग का इस्तेमाल हो सकेगा। चूंकि यात्रा सीजन शुरू होने वाला है इसलिए रामबाड़ा से गरु़ड़चट्टी वाले हिस्से पर पेयजल और विश्राम स्थलों की व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है। गरुड़चट्टी वही स्थान है जहां प्रधानमंत्री मोदी ने अवनी युवावस्था में साधना की थी। इस मार्ग के खुलने से श्रद्धालु उस स्थान के दर्शन भी आसानी से कर सकते हैं।
घोड़े-खच्चरों के लिए अलग से व्यवस्था
भविष्य में योजना यह भी है कि एक मार्ग का उपयोग केवल पैदल यात्रियों के लिए और दूसरे मार्ग का उपयोग घोड़े-खच्चरों के लिए किया जा सके, जिससे यात्रा और अधिक सुगम हो जाएगी।



