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उत्तराखंड केदारनाथ धाम में अब सिर्फ प्रोटोकॉल वालों को मिलेगी वीआईपी दर्शन की सुविधा

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रुद्रप्रयाग, 11 अप्रैल। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं. केदारनाथ धाम में इस साल यात्रा सीजन के दौरान वीआईपी दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है. अब केवल सरकारी प्रोटोकॉल के तहत आने वाले व्यक्तियों को ही वीआईपी दर्शन की अनुमति दी जाएगी, जबकि आम श्रद्धालुओं को सामान्य लाइन में लगकर ही बाबा केदार के दर्शन करने होंगे.

मंदिर पर में मोबाइल, कैमरा, फोटो खींचना, वीडियो, ब्लागिंग पर पूर्ण प्रतिबंध
मंदिर परिसर में इस बार मोबाइल, कैमरा, फोटो खींचने, वीडियो बनाने और ब्लॉगिंग पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है. मंदिर प्रशासन का मानना है कि इससे जहां अव्यवस्था पर नियंत्रण लगेगा, वहीं धार्मिक वातावरण भी अधिक शांत और गरिमामय बना रहेगा. दरअसल, हर साल वीआईपी दर्शन को लेकर अव्यवस्थाओं और पक्षपात के आरोप सामने आते रहे हैं.

तीर्थ पुरोहितों और श्रद्धालुओं द्वारा लगातार उठाई जा रही आपत्तियों के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति ने इस बार सख्त निर्णय लिया है. समिति के अनुसार अब बिना प्रोटोकॉल किसी भी व्यक्ति को वीआईपी दर्शन की अनुमति नहीं मिलेगी. इससे आम श्रद्धालुओं के साथ समानता सुनिश्चित करने और दर्शन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है.

नई व्यवस्था से श्रद्धालुओं को लंबी लाइन से मिलेगी राहत
बीकेटीसी के उपाध्यक्ष विजय कप्रवान ने बताया कि नई व्यवस्था से यात्रा प्रबंधन में सुधार होगा और श्रद्धालुओं को अनावश्यक लंबी प्रतीक्षा से राहत मिलेगी. अब देखना यह होगा कि मंदिर समिति के ये नए नियम धरातल पर कितने प्रभावी ढंग से लागू हो पाते हैं और क्या इससे श्रद्धालुओं को वास्तव में सुगम एवं बेहतर दर्शन का अनुभव मिल पाता है. गौर हो कि उत्तराखंड में 19 अप्रैल से चारधाम यात्रा की शुरुआत होनी है. इसमें यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को खुलेंगे, इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने हैं.

डेंजर जोनों की मरम्मत को मिली है 700 करोड़ की धनराशि
वहीं दूसरी ओर चारधाम यात्रा से पहले मार्गों को दुरुस्त किया जा रहा है. आपदा प्रबंधन विभाग ने डेंजर जोनों की मरम्मत के लिए करीब 700 करोड़ से ज्यादा की धनराशि स्वीकृत की है. जिससे यात्रा मार्गों के संवेदनशील 100 डेंजर जोन में से करीब 80 जोन पर कार्य जारी है. वहीं तमाम विभागों और राहत बचाव दल ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं.

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