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13 साल बाद केदारनाथ-रामबाड़ा-गरुड़चट्टी पौराणिक पैदल मार्ग से संचालित होगी बाबा केदार की यात्रा

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रुद्रप्रयाग, 1 फरवरी। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस साल की यात्रा पहले की तुलना में ज्यादा सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक होने जा रही है. साल 2013 की भीषण आपदा में क्षतिग्रस्त हुए रामबाड़ा–गरुड़चट्टी होकर केदारनाथ जाने वाले पुराने पैदल मार्ग का पुनर्निर्माण कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है. ऐसे में 13 सालों बाद इस मार्ग के दोबारा खुलने से श्रद्धालुओं को यात्रा में बड़ी राहत मिलेगी.

2013 की आपदा में ध्वस्त हो गया था पुराना पैदल मार्ग
गौर हो कि साल 2013 में 16-17 जून को केदारनाथ में आई भीषण आपदा के दौरान यह पारंपरिक पैदल मार्ग पूरी तरह ध्वस्त हो गया था. जिसके चलते यात्रियों को सालों तक सीमित सुविधाओं वाले वैकल्पिक मार्गों से होकर यात्रा करनी पड़ी. अब लोक निर्माण विभाग गुप्तकाशी ने इस मार्ग का चरणबद्ध तरीके से पुनर्निर्माण कर लिया गया है. इसके साथ ही यात्रा मार्ग पर सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं.

पुनर्निर्माण के तहत सबसे पहले केदारनाथ धाम से गरुड़चट्टी तक 3.3 किलोमीटर लंबे मार्ग का निर्माण पूरा किया गया. इसके बाद आपदा में सर्वाधिक प्रभावित रहे गरुड़चट्टी से रामबाड़ा तक 5.3 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है.

यात्रा होगी पहले से ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक
बदरी केदार मंदिर समिति के सदस्य विनीत पोस्ती ने आगे बताया कि केदारनाथ के पुराने मार्ग पर तमाम व्यवस्थाएं जुटाई जा रही है. ताकि, बाबा के दर्शनों के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो और उनकी यात्रा आसान व सुरक्षित हो. इसके लिए लगातार पुराने मार्ग पर व्यवस्थाएं बनाई जा रही है.

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस पैदल मार्ग पर पेयजल की व्यवस्था, रेन शेल्टर और रेलिंग लगाने का काम किया जा रहा है, जिनका काम अंतिम चरण में है. इससे खराब मौसम के दौरान यात्रियों को ठहरने और सुरक्षित आवागमन में सुविधा मिलेगी.
-विनीत पोस्ती, सदस्य, बदरी केदार मंदिर समिति

बाबा के दर्शन के लिए अब श्रद्धालुओं के पास दो मार्गों का विकल्प
अब केदारनाथ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के पास पैदल यात्रा के लिए दो मार्ग उपलब्ध रहेंगे. पहला मार्ग- पुनर्निर्मित गौरीकुंड–रामबाड़ा–गरुड़चट्टी–केदारनाथ मार्ग. जबकि, दूसरा मार्ग- वर्तमान में संचालित गौरीकुंड–रामबाड़ा–लिंचोली–केदारनाथ मार्ग रहेगा. मार्ग में किए गए कुछ परिवर्तनों के चलते रामबाड़ा से केदारनाथ की दूरी पहले के 7 किलोमीटर से बढ़कर अब 8.6 किलोमीटर हो गई है.

आपदा में ध्वस्त हुए पुराने पैदल मार्ग पर आगामी यात्रा सीजन 2026 से आवाजाही शुरू हो जाएगी. मार्ग का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और रेलिंग लगाने का काम अंतिम चरण में है. इस साल शुरू होने वाली केदारनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं को नए पैदल मार्ग से बड़ी राहत मिलेगी और यात्रा पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित एवं सुविधाजनक होगी.
– राजविंद सिंह, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग गुप्तकाशी

पांडवों से जुड़ा है केदारनाथ धाम का पौराणिक महत्व
हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, केदारनाथ धाम का गहरा संबंध पांडवों से है. महाभारत युद्ध के पश्चात पांडवों ने भगवान शिव से अपने पापों के प्रायश्चित के लिए तपस्या की थी. मान्यता है कि आठवीं सदी में आदि गुरु शंकराचार्य ने केदारनाथ मंदिर का पुनरुद्धार व पुनर्निर्माण कराया था, जिससे इस धाम का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व और भी बढ़ गया.

महाशिवरात्रि के दिन घोषित होगी केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि
बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि पहले ही घोषित की जा चुकी है. बदरीनाथ धाम के आगामी 23 अप्रैल को खोल दिए जाएंगे. जबकि, केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की घोषणा महाशिवरात्रि के अवसर पर की जाएगी. अभी बाबा केदार के धाम में बर्फ जमी हुई है.

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