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LPG: घबराहट में ना करें बुकिंग, दो दिन में घर पहुंचेगा सिलेंडर; लोग हो रहे परेशान

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नई दिल्ली, 11 मार्च। वर्तमान समय में देश के कुछ हिस्सों में एलपीपी आपूर्ति को लेकर चुनौतियां देखी जा रही हैं। यह संकट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम का असर गहरा होता जा रहा है। सरकार की तरफ से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि भारत में रसोई गैस समेत किसी भी पेट्रोलियम उत्पादों की कमी नहीं होने जा रही, लेकिन देश के कई हिस्सों में एलपीजी एजेंसियों के सामने ग्राहकों की भीड़ बढ़ रही है।
कमर्शियल सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर
देश कई प्रमुख शहरों के होटलों-रेस्तरां और गैस की खपत करने वाले उद्योगों की तरफ से गैस की किल्लत की बातें कही गई हैं। केंद्र सरकार की तरफ से वैश्विक आपूर्ति को सुचारू रखने की कोशिश जारी है और साथ ही घरेलू स्तर पर एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया गया है। गैस की कमी के चलते कई होटल बंद होने के कगार पर आ गये हैं।
LPG को लेकर राहत की खबर 
पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि देश की कुछ रिफाइनरियां अपनी क्षमता से ज्यादा उत्पादन कर रही हैं और एलपीजी उत्पादन तो पिछले कुछ दिनों में 25 प्रतिशत तक बढ़ गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने मीडिया के जरिए आम जनता से आग्रह किया है कि वो घबड़ाहट में बुकिंग ना करें और ना ही जरूरत से ज्यादा एलपीजी सिलेंडर घर में जमा करने की कोशिश करें। एक सिलेंडर लेने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिनों के अंतराल पर बुकिंग कराया जा रहा है और बुकिंग के दो से तीन दिनों के बीच सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
होर्मुज जल मार्ग संकट 
होर्मुज जल मार्ग के प्रभावित होने से एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है लेकिन दूसरे विकल्पों से इसकी भरपाई की जा रही है। सुजाता शर्मा ने बताया कि भारत में 14.9 करोड़ मैट्रिक टन गैस की खपत रोजाना होती है, जिसमें 4.8 करोड़ टन होर्मुज जल मार्ग से आता है और घरेलू स्तर पर 9.75 करोड़ टन उत्पादन होता है। पश्चिम एशिया संकट के शुरू होने के बाद घरेलू रिफाइनरियां ने एलपीजी का उत्पादन बढ़ा दिया है। अभी तक 25 प्रतिशत उत्पादन बढ़ा है।
एलपीजी उत्पादन के आवंटन में घरेलू क्षेत्रों को प्राथमिकता देने का फैसला एक दिन पहले ही लागू किया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया है कि मौजूदा हालात में रसोई गैस को जमा करना एक बड़ी समस्या के तौर पर सामने आने का खतरा है। इससे निपटने के लिए तेल कंपनियों के अधिकारी राज्यों के संबंधित विभागों के साथ मिलकर कदम उठा रहे हैं।
कच्चे तेल पर रूख 
कच्चे तेल आपूर्ति के बारे में पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि भारत में रोजाना 55 लाख बैरल की जरूरत है और पश्चिम एशिया संकट के बावजूद सरकारी कंपनियां रोजाना इतनी नई खरीद कर रही हैं। अगले कुछ दिनों में रूस से भी आपूर्ति बढ़ जाएगी।
भारत अभी 40 देशों से क्रूड की खरीद कर रहा है। भारत के लिए अभी आपूर्ति कोई बड़ी समस्या नहीं है। हां, जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अस्थिर हैं, वह चिंता की बात है। हालांकि घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार ने घरेलू गैस को अनिवार्य सेवा में रखा है, लेकिन डिलीवरी में सामान्य से कुछ अधिक समय लग सकता है। अफवाहों से बचें और समय पर अपनी बुकिंग सुनिश्चित करें।

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