
केएस रावत। चैत्र नवरात्र में जागृत शक्तिपीठ धारी देवी के भक्त बाबा नारायण गिरी ने सिर पर हरियाली उगाकर मां धारी को समर्पित की है। जून 24 में बाबा नारायण गिरी की चर्चा तब हुई थी जब उनकी एक अनोखी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। हिंदू धर्म में नवरात्रि के दौरान जवारे बोने की परंपरा है, लेकिन बाबा इसे अपने सिर पर धारण करते हैं।
इस समय धारी देवी में भक्तों का आकर्षण का केंद्र बने हैं हरियाली बाबा
बाबा की इस अटूट भक्ति को देखकर देवी दर्शनों को मंदिर पहुंच रहे श्रद्धालु भी अभिभूत हो रहे हैं। बता दें कि नारायण गिरी मूल रूप से मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले हैं और जूना अखाड़े से जुड़े हुए हैं। ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर श्रीनगर से करीब 14 किमी की दूरी पर स्थित धारी देवी मंदिर में इन दिनों चैत्र नवरात्र में सैकड़ों भक्त पहुंच रहे हैं।
यहां पिछले कुछ वर्षों से प्रवास कर रहे ग्वालियर के रहने वाले व जूना अखाड़ा से जुड़े बाबा नारायण गिरी देवी भक्तों के आकर्षण का केंद्र बने हैं। बाबा ने अपने सिर पर जौ की हरियाली बोई है। उन्होंने बताया कि उन्होंने सिर पर पहले कपड़ा बांधा और उसमें मिट्टी रखकर जौ के बीज बोए, जो तीन दिन में हरियाली के रूप में उग चुके हैं। हरियाली बाबा सामान्य रूप से सो नहीं सकते, क्योंकि करवट बदलने से मिट्टी और पौधे गिर सकते हैं। इसके लिए वे विशेष मुद्राओं में बैठकर ही विश्राम करते हैं।
वह हर वर्ष चैत्र माह में अपने सिर पर हरियाली बोते हैं। एक पैर से दिव्यांग नारायण गिरी बताते हैं कि जाने-अनजाने में जीवन में हुई गलतियों का पश्चाताप करने के लिए वह अब हर साल चैत्र नवरात्र के अवसर पर अपने सिर पर हरियाली बोकर मां को समर्पित करते हैं।
धारी देवी का महात्म्य
जागृत शक्तिपीठ के रूप में पूजनीय धारी देवी पूरे गढ़वाल की रक्षा करती हैं। यहां तक कहा जाता है कि जब तक देवी अपने स्थान पर विराजमान रहती हैं, तब तक क्षेत्र में बड़े संकट नहीं आते।
धारी देवी की प्रतिमा दिन में तीन रूप बदलती है
सुबह: कन्या रूप, दोपहर: युवा स्त्री, शाम: वृद्धा
यह परिवर्तन जीवन के तीन चरणों का प्रतीक माना जाता है।



