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23 साल की डॉ तन्वी की मौत की गुत्थी अभी भी अनसुलझी, पिता से रात में 1 घंटे तक की थी बात

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देहरादून, 27 मार्च। 24 मार्च को जब पूरा देश नवरात्रि पर षष्ठी के दिन मां कात्यायनी की पूजा उपासना कर रहा था, उसी दिन देहरादून में एक डॉक्टर तन्वी की दर्दनाक मौत हुई थी. हरियाणा के अंबाला सिटी की डॉ तन्वी देहरादून के एक नामी मेडिकल कॉलेज से नेत्र रोग चिकित्सा में एमएस कर रही थीं. डॉ तन्वी ने आत्महत्या की या फिर उनकी मौत की कोई और वजह थी, ये अभी तक साफ नहीं हुआ है.

देहरादून में डॉक्टर तन्वी की मौत का मामला
डॉक्टर तन्वी की मौत को तीन दिन बीत चुके हैं. उनके पिता ने उनकी विभागाध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा कराया है. पुलिस मामले की जांच पड़ताल कर रही है. जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डॉ तन्वी की कॉल डिटेल और मेडिकल कॉलेज के उनसे जुड़े तथ्यों की जांच शामिल है. लेकिन तीन दिन बाद भी कोई संतोषजनक खुलासा नहीं हुआ कि देश की एक होनहार डॉक्टर की मौत की असली वजह क्या थी.

नेत्र रोग चिकित्सा में मास्टर ऑफ सर्जरी कर रही थीं डॉ तन्वी
अभी तक जो खुलासा हुआ है, उसके अनुसार डॉक्टर तन्वी हरियाणा के अंबाला सिटी स्थित मॉडल टाउन की रहने वाली थीं. 23 साल की डॉ तन्वी एमबीबीएस के बाद देहरादून के पटेलनगर में स्थित एक बड़े मेडिकल कॉलेज से नेत्र रोग चिकित्सा में मास्टर ऑफ सर्जरी कर रही थीं.

मौत से पहले एक घंटे पिता से फोन पर बात कर परेशानी बताई थी
24 मार्च की रात उन्होंने अपने पिता जो उस समय अंबाला में थे, से करीब एक घंटे फोन पर बात की थी. पिता के अनुसार डॉ तन्वी बातचीत में परेशान लग रही थीं. उन्होंने पापा को परेशानी बताई थी. डॉ तन्वी के पिता ने बताया कि उनकी बेटी देहरादून में देहराखास में अपनी मां के साथ रहती थी.

डॉ तन्वी के तनाव के लिए विभागाध्यक्ष पर लगाया गया है आरोप
अपने नंबरों का लेकर डॉ तन्वी कुछ परेशान थीं. उनके का पिता का कहना था तन्वी ने उनको बताया कि पहले उनकी लॉग बुक में अच्छे अंक आए थे. जब से विभागाध्यक्ष बदली उन्हें कम अंक मिलने लगे. आरोप तो यहां तक है कि विभागाध्यक्ष ने कम अंक देकर फेल करने की धमकी दी थी. डॉक्टर तन्वी के पिता का आरोप है कि इसी कारण उनकी बेटी पिछले चार महीनों से गहरे तनाव में जी रही थी.

डॉ तन्वी के पिता ने विभागाध्यक्ष से मिलकर मामला सुलझाने की कोशिश की थी
स्थिति यहां तक पहुंची कि डॉ तन्वी के पिता पर्सनली नेत्र रोग विभागाध्यक्ष से मिले थे. उनसे बेटी के भविष्य को प्रभावित नहीं करने की रिक्वेस्ट की थी. डॉ तन्वी के पिता ललित मोहन का आरोप है कि इसके बाद भी विभागध्यक्ष ने अपना रवैया नहीं छोड़ा और उनकी बेटी दिन पर दिन गहरे तनाव में जाती रही.

पिता के साथ वो अंतिम कॉल और मैसेज
24 मार्च की रात जब डॉ तन्वी ने पिता से करीब एक घंटे बातचीत करके परेशानी और तनाव के बारे में बताया तो पिता भी सिहर गए थे. बेटी ने रात 11.15 बजे मैसेज भेजा कि वो 12.30 बजे तक घर पहुंच जाएगी. लेकिन उस अभागे पिता को ये जरा सा भी अहसास नहीं था कि थोड़ी देर पहले किया गया बेटी का फोन कॉल और उसके बाद का मैसेज ही उसका अंतिम कॉल और मैसेज होंगे.

डॉ तन्वी घर नहीं पहुंची तो अंबाला से देहरादून रवाना हुए पिता
जब डॉ तन्वी घर नहीं पहुंची और उसका फोन भी नहीं लगा तो घबराए पिता रात में ही तत्काल अंबाला से देहरादून के लिए रवाना हुए. किसी अनहोनी की आशंका से डरे पिता अंबाला से देहरादून की करीब पौने दो सौ किलोमीटर की दूरी 4 घंटे से भी कम समय में तय कर देहरादून पहुंच गए.

कार में मृत मिला थीं डॉ तन्वी
देर रात अस्पताल मार्ग पर डॉ तन्वी की कार अस्पताल रोड के किनारे खड़ी मिली. कार अंदर से लॉक थी. इसके बाद परिजनों ने कार का शीशा तोड़कर देखा तो अंदर डॉ तन्वी अचेत अवस्था में सीट पर पड़ी थीं. उनके हाथ पर कैनुला लगी थी. कार में इंजेक्शन रखे हुए थे. तत्काल उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

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