
देहरादून, 6 अप्रैल। उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर अक्सर सवाल खड़े होते रहे हैं. जिसमें मुख्य रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. ऐसा ही कुछ मामला पौड़ी जिला अस्पताल में सामने आया है. जहां पर लगाए गए सिटी स्कैन मशीन का बेहतर ढंग से रख रखाव न होने के चलते लंबे समय से खराब पड़ी हुई है. जिसको देखते हुए शासन ने सीटी स्कैन मशीन के रख रखाव में गंभीर लापरवाही पाए जाने के मामले में तत्कालीन सीएमओ और प्रमुख अधीक्षक को निलंबित कर दिया है.
2022 से खुले में धूल फांक रही थी सीटी स्कैन मशीन
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, पौड़ी जिला चिकित्सालय में साल 2022 से इस सीटी स्कैन मशीन को बिना किसी सुरक्षा प्रबंध के खुले में रखा गया, जिसके कारण ये मशीन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. जबकि, इस मशीन को मरीजों की गंभीर बीमारियों से राहत देने के मकसद से करोड़ों रुपए की लागत से स्थापित की गई थी. इस मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से अपने दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही, उदासीनता एवं सरकारी संपत्ति के संरक्षण में असफलता सामने आई है.
CMO डा. विजयेश भारद्वाज निलंबित, विभागीय कार्रवाई शुरू
ऐसे में जांच के बाद तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक डॉ. विजयेश भारद्वाज को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है. इन तथ्यों के आधार पर उत्तराखंड शासन ने डॉ. विजयेश भारद्वाज को निलंबित करते हुए उनके खिलाफ नियमानुसार विभागीय जांच भी शुरू कर दी है. इसके अलावा तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर प्रवीण कुमार को भी निलंबित किया गया है. वे अभी वर्तमान में अल्मोड़ा में मुख्य चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात हैं.
पीपीपी मोड पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले इंद्रेश को कारण बताओ नोटिस
इसके अलावा उत्तराखंड शासन ने इस मामले में महंत इंद्रेश अस्पताल प्रबंधन समिति पटेल नगर (देहरादून) को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है. बता दें कि उस दौरान इंद्रेश अस्पताल ही पौड़ी में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराता था. इसलिए महंत इंद्रेश चिकित्सालय प्रबंधन समिति को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि ‘आपको स्पष्ट रूप से दोषी मानते हुए आपके खिलाफ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और जनहित की सेवाओं को ठप करने के लिए, क्यों न मशीन की वर्तमान बाजार दरों की कीमत की वसूली की कार्रवाई शुरू की जाए. साथ ही भविष्य के लिए सरकारी साझेदार के रूप में आपको काली सूची में डाल दिया जाए.’
स्वास्थ्य विभाग से भी मांगा गया जवाब
शासन ने स्वास्थ्य विभाग से भी इस लापरवाही के लिए जवाब मांगा है. वहीं, इस पूरे मामले पर स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी चिकित्सा संस्थानों में उपलब्ध संसाधनों का उचित रख रखाव सुनिश्चित किया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए काम कर रही है. ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही या जनता के हितों की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
सुबोध उनियाल, स्वास्थ्य मंत्री
बता दें कि पिछले महीने धामी मंत्रिमंडल का विस्तार होने के बाद कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसके बाद से ही स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल आए दिन अस्पतालों का निरीक्षण कर रहे हैं. इसी कड़ी में बीते दिन उन्होंने टिहरी जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था. इस दौरान जिला अस्पताल में मरीजों के लिए बने टॉयलेट में साफ सफाई की व्यवस्था न होने के चलते मंत्री उनियाल ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर्स को कड़ी फटकार भी लगाई थी.



