उत्तराखंडबड़ी खबरयूथ कार्नरराजनीतिसामाजिक

विधानसभा में महिला आरक्षण बिल का मुद्दा गूंजा, बाहर उठी अंकिता को इंसाफ दिलाने की आवाज

Listen to this article

देहरादून, 28 अप्रैल। नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम पारित नहीं होने का ठीकरा बीजेपी लगातार विपक्षी दलों पर फोड़ रही है. इसीलिए 28 अप्रैल को उत्तराखंड विधानसभा में विशेष सत्र बुलाकर निंदा प्रस्ताव लाया गया था. एक तरफ जहां इस मुद्दे पर सदन में सरकार, कांग्रेस को घेरने में लगी हुई थी तो वहीं विधानसभा के बाहर सड़क पर अंकिता भंडारी हत्याकांड को इंसाफ दिलाने की आवाजा उठ रही थी.

अंकिता भंडारी मामले को लेकर सड़कों पर दिखा उबाल
दरअसल, मंगलवार को विधानसभा के विशेष सत्र में विभिन्न संगठनों ने कूच करके सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का काम किया किया तो वहीं 2022 में हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले पर सड़कों पर उबाल देखने को भी मिला. इसी कड़ी में अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने अंकिता को न्याय और वीआईपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हरिद्वार रोड स्थित एलआईसी बिल्डिंग से रैली निकालते हुए विधानसभा कूच किया, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रिस्पना पुल से पहले हरिद्वार रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया.

महिलाओं ने अंकिता भंडारी को इंसाफ दिलाने के लिए फिर उठाई आवाज
इसी दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ विधान भवन तक पहुंचने को लेकर तीखी नोंक झोंक भी हुई. अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की सदस्य कमला पंत ने कहा कि भाजपा सरकार एक दिन का नारी शक्ति वंदन विधानसभा सत्र लाकर महिलाओं की हितेषी होने की प्रपंच कर रही है. उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड को तीन साल से ऊपर हो गए हैं. इस मामले में जिस वीआईपी का नाम सामने आया हैं, वह खुलेआम घूम रहे हैं और मुख्यमंत्री के साथ फोटो खिंचवा रहे हैं, लेकिन आज तक उनको ना तो गिरफ्तार किया गया और ना उन पर कोई कार्रवाई की गई.

कमला पंत ने सरकार पर वीआईपी को संरक्षण दिए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने पूरी ताकत लगा रखी है कि किसी तरह अंकिता हत्याकांड के वीआईपी अपराधियों को बचाया जाए, क्योंकि जिन वीआईपी के नाम सामने आए हैं, वह भाजपा से जुड़े हुए हैं. कमला पंत का कहना है कि अंकिता को संपूर्ण न्याय नहीं मिला तो इस लड़ाई को पूरे हिंदुस्तान तक देशव्यापी चलाया जाएगा. उन्होंने कहा कि अंकिता का सवाल अब उत्तराखंड के जल, जंगल, जमीन और यहां के विकास की नीति के साथ जुड़ गया है. सरकार उत्तराखंड में ऐसी नीतियां ला रही है, उन जन विरोधी नीतियों से राज्य के जंगल उजड़ रहे हैं, यहां के पर्यावरण को नष्ट किया जा रहा है.

कमला पंत का आरोप है कि राज्य में रिजॉर्ट संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है है, लेकिन जब इन रिजॉर्ट में पहाड़ की बेटियां नौकरियां करने जाती है, तो उनसे स्पेशल सर्विस की डिमांड की जाती है. उन्होंने कहा कि यहां के निवासियों ने उत्तराखंड राज्य संघर्षों की बदौलत हासिल किया है. लेकिन यही राज्य अब नौ हिमालयी राज्यों में महिला अपराध के मामलों पर पहले पायदान पर पहुंच गया है.

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर इसके लिए सरकार जिम्मेदार नहीं है तो फिर कौन इसका जिम्मेदार है? इन सभी विषयों को लेकर उन्हें आज विधानसभा कूच करना पड़ा है. मंच से जुड़े सदस्यों का कहना है कि भाजपा का चाल चरित्र महिला विरोधी है.

अंकिता भंडारी हत्याकांड के वीआईपी को संरक्षण देने वाली भाजपा नारी वंदन के नाम पर केवल राजनीतिक ढोंग कर रही है. मंच ने एक दिन के नारी वंदन सत्र को राजनीतिक नौटंकी करार देते हुए कहा कि बेहतर होता कि सरकार आज के विशेष सत्र को अंकिता भंडारी के नाम पर आहूत करती.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button