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पौड़ी और टिहरी जिले में स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग शिविर शुरू, हफ्ते में दो दिन लगेगा कैंप

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देहरादून, 28 अप्रैल। उत्तराखंड में महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर करने की दिशा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है. जिसके तहत पौड़ी और टिहरी जिलों में स्तन कैंसर की समय रहते पहचान के लिए आधुनिक तकनीक डिवाइस के जरिए हफ्ते में दो बार स्क्रीनिंग शिविर आयोजित किया जाएगा. ताकि, प्रदेश की महिलाओं में बढ़ते स्तन कैंसर के मामलों की शुरुआती पहचान कर समय पर उनका उपचार किया जा सके.

आधुनिक तकनीक डिवाइस से होगी स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान
एनएचएम के सहायक निदेशक डॉ. फीदुज्जफर ने बताया कि आधुनिक तकनीक डिवाइस के माध्यम से स्क्रीनिंग से स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान संभव होगी. विभाग की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं तक ये सुविधा पहुंचे और समय रहते उनका उपचार सुनिश्चित किया जा सके.

एनएचएम की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, पौड़ी जिले में दो आधुनिक तकनीक डिवाइस जिला चिकित्सालय में और एक उप जिला चिकित्सालय (जैसे श्रीनगर या कोटद्वार बेस अस्पताल) में स्थापित किए गए हैं, ताकि महिलाओं को सुविधा मिल सके। वहीं, टिहरी जिले में एक डिवाइस जिला चिकित्सालय में लगाया गया है. इन डिवाइसों के जरिए अत्याधुनिक तकनीक से स्तन कैंसर की प्रारंभिक जांच की जा सकेगी, जिससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं को भी लाभ मिलेगा.

हफ्ते में दो बार लगेगा स्क्रीनिंग शिविर
सभी एनसीडी (नॉन कम्युनिकेबल डिजीज) क्लीनिकों में कैंप मोड में हफ्ते में दो बार स्क्रीनिंग शिविर आयोजित किए जाएंगे. ये शिविर हर मंगलवार और शुक्रवार को लगाए जाएंगे. हालांकि, इस हफ्ते शुक्रवार को अवकाश होने के चलते पहला शिविर शनिवार को आयोजित किया जाएगा.

लक्षण पाए जाने पर स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास किया जाएगा रेफर
हर कैंप में ज्यादा से ज्यादा महिलाओं की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया है. स्क्रीनिंग के दौरान जिन महिलाओं में स्तन कैंसर के लक्षण संदिग्ध पाए जाएंगे, उन्हें तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास रेफर किया जाएगा. इससे समय रहते जांच और उपचार शुरू हो सकेगा, जो इस बीमारी से बचाव में बेहद महत्वपूर्ण है.

एनसीडी क्लीनिक में तैनात रहेंगे डॉक्टर और स्टाफ नर्स
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि समय पर पहचान होने से स्तन कैंसर के मामलों में मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है. एनएचएम ने इस अभियान के सफल संचालन के लिए हर एनसीडी क्लीनिक में एक चिकित्सा अधिकारी (MO) और एक स्टाफ नर्स (SN) को नामित करने के निर्देश दिए हैं.

स्तन कैंसर तब विकसित होता है जब स्तन की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, जिससे ट्यूमर बन जाते हैं जो शुरुआती इलाज न होने पर फैल सकते हैं। इसके सामान्य लक्षणों में स्तन या बगल में एक नई, अक्सर दर्द रहित, कठोर गांठ, स्तन के आकार में परिवर्तन, त्वचा में गड्ढे पड़ना या निपल्स से स्राव होना शामिल हैं। स्व-जांच और स्क्रीनिंग (जैसे, मैमोग्राम) के माध्यम से शुरुआती पहचान महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उपचार की सफलता दर 90% या उससे अधिक होती है

यह पहल महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. शुरुआती स्तर पर कैंसर की पहचान होने से उपचार की सफलता दर बढ़ती है और जीवन बचाया जा सकता है.
– डॉ. रश्मि पंत, निदेशक, एनएचएम उत्तराखंड

स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि इस अभियान से न केवल स्तन कैंसर की समय पर पहचान संभव होगी, बल्कि महिलाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी. उत्तराखंड में शुरू की गई यह पहल महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक अहम कदम साबित हो सकती है, जो भविष्य में गंभीर बीमारियों से बचाव और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में मील का पत्थर बनेगी.

ये कार्यक्रम राज्य में कैंसर नियंत्रण के प्रयासों को मजबूत करेगा. नियमित शिविरों के माध्यम से हम ज्यादा से ज्यादा महिलाओं की स्क्रीनिंग कर पाएंगे और संदिग्ध मामलों की समय पर पहचान सुनिश्चित होगी. हमारी प्राथमिकता है कि हर महिला तक यह सुविधा पहुंचे.
– मनुज गोयल, मिशन निदेशक, एनएचएम उत्तराखंड

चूंकि यह अभियान सरकार ने हाल ही में चलाया है। इसलिए आप अपने इलाके के नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र CHC या जिला अस्पताल के ओपीडी काउंटर से उस दिन के विशेष कैंप की सटीक जानकारी ले सकते हैं। इन शिविरों में एक चिकित्सा अधिकारी और स्टाफ नर्स को विशेष रूप से स्क्रीनिंग और परामर्श के लिए तैनात किया गया है।

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