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बिथ्याणी डिग्री कालेज में अकादमिक मंथन: AMU और कुमाऊं विवि के दिग्गजों ने दी उच्च शिक्षा को नई दिशा

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​बिथ्याणी, यमकेश्वर, 20 मई। ​उच्च शिक्षा के बदलते परिदृश्य, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन और युवाओं में कौशल विकास की महत्ता को रेखांकित करने के लिए महायोगी गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय, बिथ्याणी तथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय विशेष कार्यक्रम का बुधवार को समापन हो गया। कार्यक्रम के दूसरे और अंतिम दिन ज्ञान, विमर्श और अकादमिक मंथन की त्रिवेणी बही, जिसमें देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों ने प्रतिभाग किया।

साझा प्रयास उच्च शिक्षा में मील का पत्थर: डॉ. त्यागी
​द्वितीय दिवस के औपचारिक सत्र की शुरुआत मुख्य संयोजक डॉ. उमेश त्यागी के संबोधन के साथ हुई। उन्होंने सत्र की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए दोनों संस्थानों के इस साझा प्रयास को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर बताया। डॉ. त्यागी ने कहा कि इस प्रकार के अकादमिक आदान-प्रदान से न केवल प्राध्यापकों के दृष्टिकोण में व्यापकता आती है, बल्कि ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी वैश्विक मानकों के अनुरूप सीखने का अवसर मिलता है।

​इसके पश्चात, महाविद्यालय के प्राचार्य ने अपने स्वागत उद्बोधन में देश के विभिन्न अंचलों से आए मुख्य वक्ताओं और प्रतिभागी प्राध्यापकों का आत्मीय अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि एएमयू जैसी ऐतिहासिक संस्था के साथ मिलकर गंभीर विषयों पर चर्चा आयोजित करना गौरव की बात है। यह बौद्धिक विमर्श आने वाले समय में उच्च शिक्षा की दिशा तय करने में सहायक सिद्ध होगा।

​प्रथम सत्र: डिग्री के साथ ‘हुनर’ होना अनिवार्य, पलायन रोकने में मददगार होगा कौशल विकास
​विषय: कौशल विकास एवं व्यावसायिक शिक्षा (Skill Development & Vocational Education)
​मुख्य वक्ता: प्रो. दिव्या उपाध्याय जोशी (कार्यक्रम निदेशक, UGC-MMTTC, कुमाऊं विश्वविद्यालय)
​सत्र अध्यक्ष: डॉ. गिरिराज सिंह (राजकीय महाविद्यालय, बिथ्याणी)
​धन्यवाद ज्ञापन: डॉ. राजीव सक्सेना (राजकीय महाविद्यालय, बनबसा)

​मुख्य व्याख्यान का सार
मुख्य वक्ता प्रो. दिव्या उपाध्याय जोशी ने वर्तमान समय में केवल डिग्री आधारित शिक्षा की सीमाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक बाजार में ‘डिग्री के साथ-साथ हुनर (Skill)’ का होना अनिवार्य है। एनईपी-2020 का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे स्कूल और कॉलेज स्तर से ही व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ने का खाका तैयार किया गया है।

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में स्थानीय संसाधनों, पर्यटन, जैविक खेती और हस्तशिल्प से जुड़े कौशल विकास पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देकर हम न केवल पलायन रोक सकते हैं, बल्कि युवाओं को रोजगार मांगने वाले के बजाय ‘रोजगार देने वाला’ (Entrepreneur) बना सकते हैं।
प्रो. दिव्या उपाध्याय जोशी

सत्र की अध्यक्षता कर रहे डॉ. गिरिराज सिंह ने कहा कि कौशल विकास को किताबी ज्ञान से निकालकर धरातल पर उतारने की आवश्यकता है। अंत में डॉ. राजीव सक्सेना ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

​द्वितीय सत्र: तक्षशिला-नालंदा से एनईपी-2020 तक के सफर का ऐतिहासिक विश्लेषण
​विषय: भारत में उच्च शिक्षा और एनईपी 2020 (Higher Education in India: NEP 2020)
​मुख्य वक्ता: प्रो. सी. पी. एस. चौहान (पूर्व अध्यक्ष, शिक्षा विभाग, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय)
​सत्र अध्यक्ष: डॉ. राम सिंह सामंत (राजकीय महाविद्यालय, बिथ्याणी)
​धन्यवाद ज्ञापन: डॉ. नीतू तिवारी (पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना)

​मुख्य व्याख्यान का सार
भोजन अवकाश के बाद शुरू हुए द्वितीय सत्र में शिक्षा शास्त्र के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान प्रो. सी. पी. एस. चौहान ने भारतीय शिक्षा के ऐतिहासिक सफर का खाका खींचा। उन्होंने तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय से शुरू होकर आक्रमणकारियों के दौर, ब्रिटिश काल के प्रयासों और विभिन्न शिक्षा आयोगों से होते हुए वर्तमान शिक्षा प्रणाली तक के सफर का व्यापक तुलनात्मक विश्लेषण पेश किया।

​प्रो. चौहान ने कहा कि एनईपी-2020 भारतीय शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का एक साहसिक प्रयास है। उन्होंने ‘मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट सिस्टम’ और बहुविषयक दृष्टिकोण (Multidisciplinary Approach) जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। हालांकि, उन्होंने आगाह भी किया कि इस नीति की सफलता बेहतर क्रियान्वयन और बुनियादी ढांचे के विकास पर निर्भर करती है। इसके लिए शिक्षकों को भी खुद को लगातार अपग्रेड करना होगा।

​अध्यक्षीय भाषण में डॉ. राम सिंह सामंत ने कहा कि एनईपी को पूरी तरह लागू करने में शिक्षकों और अकादमिक प्रशासकों की भूमिका मार्गदर्शक की होगी। सत्र का औपचारिक समापन पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय की डॉ. नीतू तिवारी द्वारा प्रस्तुत ‘बोर्ड ऑफ थैंक्स’ के साथ हुआ।

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