
यमकेश्वर, 3 जुलाई, 26 वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी डॉ. शक्तिशैल कपरवाण ने एक वीडियो जारी कर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज से थलनदी झील परियोजना की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में थलनदी झील का प्रस्ताव सक्षम अधिकारियों और शासन को भेजा गया था, जिसकी उस समय की डीपीआर लगभग 15.5 करोड़ रुपये की थी। लेकिन छह वर्ष बीत जाने के बाद भी परियोजना को स्वीकृति मिली है या नहीं, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। थलनदी झील परियोजना उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर ब्लॉक में प्रस्तावित एक प्रमुख पर्यटन और जल संरक्षण पहल है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
थलनदी झील परियोजना की फाइल कहां लंबित है, कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा
डॉ. कपरवाण ने कहा कि इस संबंध में मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री को भी क्षेत्र की जनता की ओर से कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कारण क्षेत्रीय जनता में नाराजगी है। उन्होंने कहा कि सतपुली, ल्वाली, स्यूंसी और थलनदी झील परियोजनाओं का सर्वे एक साथ हुआ था। इनमें अन्य परियोजनाएं या तो बन चुकी हैं, निर्माणाधीन हैं अथवा अंतिम चरण में हैं, जबकि थलनदी झील परियोजना अब तक लंबित है और उसकी फाइल कहां लंबित है, इसकी जानकारी भी नहीं दी जा रही है।
विधायकों और जनप्रतिनिधियों की नाकामियों का परिणाम है थलनदी झील परियोजना का अधर में लटकना
डॉ. कपरवाण ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यदि विधायक और सांसद प्रभावी ढंग से पैरवी करते तो थलनदी झील को भी अब तक स्वीकृति मिल चुकी होती। उन्होंने कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज से मांग की कि थलनदी झील परियोजना पर तत्काल कार्रवाई कर इसी वर्ष इसकी स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया शुरू कराई जाए। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र की जनता की मांग है और सरकार को इस पर शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।
पौड़ी जिले में पर्यटन और जल संरक्षण के लिए कुल 7 झीलों के निर्माण की योजना थी, जिनमें से ल्वाली झील बनकर तैयार हो चुकी है। स्थानीय लोग व जन-प्रतिनिधि थलनदी में भी इस निर्माण कार्य को जल्द शुरू करने की मांग कर रहे हैं ताकि क्षेत्र से पलायन रुक सके। इस झील के निर्माण के लिए स्थानीय संगठनों द्वारा सरकार से लगातार जानकारी मांगी जा रही है। स्थानीय निवासियों द्वारा इस महत्वकांक्षी परियोजना के लिए बड़ोली, नाली और डांगल जैसे गांवों में भूमि दान की गई है।



