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‘यत जीव, तत शिव’ का संदेश और अटल का राष्ट्र निर्माण, परमार्थ निकेतन में दोनों विभूतियों को नमन

ऋषिकेश, 16 अगस्त, 26. महान संत एवं आध्यात्मिक चेतना के प्रकाशपुंज परमहंस श्री रामकृष्ण तथा भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री और राष्ट्रऋषि श्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन की ओर से दोनों महान विभूतियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर उनके जीवन, विचारों और राष्ट्र व मानवता के प्रति योगदान को स्मरण किया गया।

स्वामी परमहंस और वाजपेयी को नमन
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष एवं परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्रचेतना के अद्भुत समन्वय में निहित है। परमहंस श्री रामकृष्ण जी ने भारत की आध्यात्मिक चेतना को जागृत किया, वहीं अटल बिहारी वाजपेयी जी ने राष्ट्र के स्वाभिमान और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त स्वर दिया।

विशेष प्रार्थना एवं शांति पाठ
गंगा तट पर आयोजित आरती के साथ साधकों, श्रद्धालुओं और आश्रम परिवार एवं दोनों महान आत्माओं की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की गयी। चिदानंद ने कहा कि परमहंस श्री रामकृष्ण जी का जीवन प्रेम, भक्ति, करुणा, आत्मबोध और सर्वधर्म समभाव का संदेश देता है। उन्होंने अपने जीवन से यह बताया कि सत्य एक है, जबकि उसे प्राप्त करने के मार्ग अनेक हो सकते हैं। उनका आध्यात्मिक संदेश आज भी विश्व को शांति, सद्भाव और एकात्मता की प्रेरणा देता है।

वाजपेयी का जीवन आधुनिक भारत की राष्ट्रचेतना का सशक्त अध्याय
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी का जीवन आधुनिक भारत की राष्ट्रचेतना का सशक्त अध्याय है। उन्होंने राजनीति को सत्ता के बजाय सेवा का माध्यम माना। उनके व्यक्तित्व में राष्ट्रभक्ति, मानवीय संवेदना, लोकतांत्रिक मर्यादा और नेतृत्व का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता था। उन्होंने कहा कि अटल जी की वाणी में राष्ट्र का स्वाभिमान और हृदय में भारत की आत्मा थी। उनकी कविताओं में संघर्ष के बीच आशा, निराशा के बीच संकल्प और अंधकार के बीच प्रकाश की खोज का संदेश मिलता है।

स्वामी जी ने कहा कि परमहंस श्री रामकृष्ण की आध्यात्मिक दृष्टि और अटल बिहारी वाजपेयी की राष्ट्रदृष्टि आज की पीढ़ी को अपने भीतर जागरण और कर्मों के माध्यम से राष्ट्र एवं मानवता की सेवा का मार्ग दिखाती है। दोनों महान विभूतियों का जीवन आध्यात्मिक जागरण, सेवा, संस्कार और राष्ट्रनिर्माण के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

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