
देहरादून, 8 सितंबर, 26. साइबर ठगों ने देहरादून की एक रिटायर्ड महिला प्रिंसिपल को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 73.60 लाख रुपए ठग लिए. आरोपियों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताकर महिला को करीब 24 दिन तक घर से बाहर नहीं निकलने और किसी से मामले की जानकारी साझा नहीं करने के लिए दबाव में रखा. पीड़िता की शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
साइबर ठगों ने सात अगस्त को किया था फोन
जानकारी के मुताबिक महिला को 7-8 अगस्त को पहली बार साइबर ठगों का फोन आया. कॉल करने वालों ने अपना नाम सब इंस्पेक्टर राहुल और संजय बताया था. उन्होंने खुद को CBI व मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। साइबर ठगो ने बताया कि उनके पहचान पत्र पर जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल करोड़ों रुपए के घोटाले में किया गया है. इसके बाद ठगों ने कथित जांच और पुलिस वेरिफिकेशन के नाम पर महिला को अपने जाल में फंसा लिया.
आरोपियों ने अलग-अलग बैंक खातों ने 73.60 लाख रुपए ट्रांसफर करवाए
साइबर ठगों ने महिला से कहा कि जांच पूरी होने तक उनकी रकम आरबीआई के पास सुरक्षित रखी जाएगी. साथ ही महिला को किसी अन्य व्यक्ति से इस संबंध में बात नहीं करने के लिए कहा गया था. इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में कुल 73.60 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए गए. ठगी को विश्वसनीय बनाने के लिए आरोपियों ने वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी में खुद को अधिकारी के तौर पर पेश किया और जांच एजेंसियों जैसा फर्जी सेटअप भी दिखाया.
लगातार मिल रहे धमकी भरे निर्देशों और कार्रवाई के डर से महिला ने घर में रहने वाले अपने डॉक्टर बेटे तक को मामले की जानकारी नहीं दी. बताया गया कि पति ने भी महिला को सावधान किया, लेकिन वह साइबर ठगों के बनाए डर के माहौल से बाहर नहीं निकल सकीं. इसी तरह अगस्त तक यह सिलसिला चलता रहा. बाद में जब बेटे को पूरे मामले की जानकारी मिली तो उसने साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद पुलिस को तहरीर दी गई.
अजय सिंह, एसएसपी एसटीएफ



