
देहरादून, 8 सितंबर, 26 स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कालेजों के 600 से अधिक एमबीबीएस इंटर्न के बाद मंगलवार से अब करीब 600 पीजी डाक्टर भी कार्य बहिष्कार पर चले गए हैं। इससे दून अस्पताल समेत प्रदेश के अन्य प्रमुख सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवायें प्रभावित हो रही हैं।
राजकीय दून मेडिकल कालेज अस्पताल में इसका असर ओपीडी और वार्ड की व्यवस्थाओं पर पड़ा। ओपीडी में मरीजों की भीड़ बढ़ने से उन्हें चिकित्सकों से परामर्श के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। इससे अस्पताल की नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं।
एमबीबीएस इंटर्न बीते सोमवार से 17 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। वहीं, पीजी डाक्टरों को वर्तमान में करीब 69 से 71 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड मिल रहा है। पीजी डाक्टर इसे बढ़ाकर 1.10 लाख रुपये करने की मांग कर रहे हैं। प्रदेशभर में करीब 600 पीजी डॉक्टर कार्य बहिष्कार कर रहे हैं। कार्य बहिष्कार के चलते ओपीडी, वार्ड और इलेक्टिव ओटी में नियमित काम प्रभावित रहा।
ओपीडी में मरीजों को सीधे चिकित्सकों के पास जाना पड़ा, जिससे कई विभागों में भीड़ बढ़ गई। हालांकि, मरीजों की परेशानी को देखते हुए इमरजेंसी और इमरजेंसी ओटी की सेवाएं जारी रखी गईं। पीजी डाक्टरों ने दून अस्पताल की ओपीडी बिल्डिंग में ही धरना-प्रदर्शन कर विरोध जताया। उनका कहना है कि स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सरकार और सिस्टम की ओर से अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।
ऐसे में उन्हें कार्य बहिष्कार का निर्णय लेना पड़ा। इंटर्न के बाद अब पीजी डॉक्टरों के आंदोलन में शामिल होने से सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है।



