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बदरीनाथ महोत्सव में स्थानीय हस्तशिल्प और पहाड़ी व्यंजनों के स्टाल बने आकर्षण का केंद्र

चमोली, 19 सितंबर, 26. बदरीनाथ धाम स्थित टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में शनिवार को देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ. देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन भारतीय सेना एवं जिला प्रशासन चमोली के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है. दो दिवसीय महोत्सव की थीम ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ है. महोत्सव में श्रद्धालुओं, पर्यटकों, स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों, कलाकारों, महिला स्वयं सहायता समूहों एवं स्थानीय उद्यमियों ने प्रतिभाग किया.

गढ़वाली लोकगीत, लोकनृत्य, छोलिया नृत्य और पांडव नृत्य ने दर्शकों का मन मोहा
इस अवसर पर महोत्सव में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति,कला एवं परंपराओं की आकर्षक झलक देखने को मिली. गढ़वाली लोकगीत, लोकनृत्य, पांडव नृत्य, छोलिया नृत्य तथा पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया. कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से देवभूमि की सांस्कृतिक विविधता, लोक परंपराओं और हिमालयी जीवनशैली को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया.

महोत्सव में स्थानीय उत्पादों के स्टालों ने खूब ध्यान खींचा
महोत्सव परिसर में लगाए गए विभिन्न स्टॉल भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे. यहां हस्तशिल्प, हथकरघा, ऊनी वस्त्र, जैविक उत्पाद, पारंपरिक आभूषण, स्थानीय मसाले, जड़ी-बूटी उत्पाद, लकड़ी से निर्मित सामग्री एवं पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया गया. महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों द्वारा तैयार उत्पादों को आगंतुकों ने खूब सराहा.महोत्सव ने स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ ही स्वरोजगार एवं आर्थिक सशक्तीकरण के अवसरों को बढ़ावा देने का मंच प्रदान किया.

सैनिकों के जीवन पर आधारित भारतीय सेना की विशेष प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही
भारतीय सेना की विशेष प्रदर्शनी भी महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रही. विद्यार्थियों एवं युवाओं ने सेना के आधुनिक उपकरणों, सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों के जीवन,आपदा राहत एवं जनसेवा कार्यों तथा राष्ट्र निर्माण में सेना की भूमिका से जुड़ी जानकारी प्राप्त की. प्रदर्शनी के माध्यम से युवाओं को भारतीय सेना के कार्यों और सीमांत क्षेत्रों में उसकी भूमिका को करीब से समझने का अवसर मिला.महोत्सव में विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की. आयोजन ने युवाओं को अपनी लोक परंपराओं, कला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ ही अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना को मजबूत करने का अवसर प्रदान किया.

वाइब्रेंट विलेज पहल
देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव ने धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक एवं सीमा पर्यटन को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है. बदरीनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को उत्तराखंड की स्थानीय संस्कृति, कला, खान-पान एवं उत्पादों से परिचित होने का अवसर मिला. इससे स्थानीय बाजार, होटल, होमस्टे, परिवहन, भोजनालय तथा अन्य व्यवसायों को भी लाभ मिलने की संभावनाएं बढ़ी हैं.

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